Sonam Wangchuk ने तोड़ा 26 दिन का उपवास, केंद्र सरकार ने दिए लिखित आश्वासन, Medanta Hospital में खत्म किया अनशन

Delhi/Gurugram: शिक्षा सुधारों और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा की मांग कर रहे एक्टिविस्ट Sonam Wangchuk ने अपना 26 दिनों का अनिश्चितकालीन उपवास खत्म कर दिया है। शुक्रवार, 24 जुलाई 2026 की आधी रात के बाद उन्होंने

Delhi/Gurugram: शिक्षा सुधारों और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा की मांग कर रहे एक्टिविस्ट Sonam Wangchuk ने अपना 26 दिनों का अनिश्चितकालीन उपवास खत्म कर दिया है। शुक्रवार, 24 जुलाई 2026 की आधी रात के बाद उन्होंने गुरुग्राम के Medanta Hospital में अपना व्रत तोड़ा। केंद्र सरकार की तरफ से उनकी मांगों पर लिखित आश्वासन मिलने के बाद उन्होंने यह फैसला लिया।

Sonam Wangchuk ने अपना अनशन 28 जून 2026 को परीक्षा अनियमितताओं के खिलाफ और सुधारों की मांग को लेकर शुरू किया था। स्वास्थ्य बिगड़ने के कारण 18 जुलाई को दिल्ली पुलिस उन्हें जंतर मंतर से हटाकर Safdarjung Hospital ले गई थी। इसके बाद दिल्ली हाई कोर्ट ने हस्तक्षेप किया और 21 जुलाई को आदेश दिया कि उन्हें उनकी पसंद के अस्पताल में शिफ्ट किया जाए। इसके बाद उन्हें Safdarjung Hospital से डिस्चार्ज कर Medanta Hospital भेजा गया, जहाँ उनकी पत्नी Gitanjali Angmo को उनके पास रहने की अनुमति मिली।

उपवास खत्म करने से पहले Wangchuk ने एक वीडियो जारी कर Safdarjung Hospital में उनके साथ हुए व्यवहार और बाधाओं के आरोप लगाए थे, जिस पर अस्पताल प्रशासन ने स्पष्ट किया कि वीडियो कोर्ट के लिखित आदेश मिलने से पहले का था। अंत में, केंद्रीय मंत्री J.P. Nadda और Jitendra Singh ने उनसे मुलाकात की और सरकार के आश्वासनों को पहुँचाया।

सरकार ने Wangchuk को तीन मुख्य लिखित आश्वासन दिए हैं:

  • जंतर मंतर और 20 जुलाई की रैली में शामिल शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर कोई कानूनी कार्रवाई या केस दर्ज नहीं होगा।
  • NEET पेपर लीक विवाद के बाद आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को उचित मुआवजा देने पर सकारात्मक विचार किया जाएगा।
  • संसद में NEET पेपर लीक और परीक्षा सुधारों पर विस्तृत चर्चा होगी ताकि जवाबदेही तय की जा सके।