सिया-केतन केस के बाद बदला शादी का ट्रेंड, अब कुंडली नहीं प्राइवेट डिटेक्टिव से हो रही है पार्टनर की जांच
Delhi/Maharashtra: पुणे के कारोबारी केतन अग्रवाल की हत्या के मामले ने देशभर में शादी और रिश्तों को लेकर डर पैदा कर दिया है. इस खौफनाक घटना के बाद अब लोग कुंडली मिलान के बजाय प्राइवेट डिटेक्टिव के जरिए अपने होने वाले पार्
Delhi/Maharashtra: पुणे के कारोबारी केतन अग्रवाल की हत्या के मामले ने देशभर में शादी और रिश्तों को लेकर डर पैदा कर दिया है. इस खौफनाक घटना के बाद अब लोग कुंडली मिलान के बजाय प्राइवेट डिटेक्टिव के जरिए अपने होने वाले पार्टनर की असलियत जानने लगे हैं. दिल्ली-एनसीआर समेत कई शहरों में प्री-मैरिटल वेरिफिकेशन का चलन तेजी से बढ़ रहा है ताकि धोखे से बचा जा सके.
पुणे पुलिस की जांच में सामने आया कि रियल एस्टेट कारोबारी केतन अग्रवाल की हत्या में उनकी मंगेतर सिया गोयल और उसके कथित प्रेमी चेतन चौधरी आरोपी हैं. पुलिस अब डिजिटल सबूतों, कॉल रिकॉर्ड और मोबाइल डेटा के आधार पर मामले की जांच कर रही है. सिया ने केतन को धक्का देने की बात से इनकार किया है, इसलिए पुलिस अब अदालत से अनुमति लेकर सिया और चेतन का पॉलीग्राफ टेस्ट कराने की तैयारी में है.
इस मामले में एक अहम बात यह है कि केतन को शादी से पहले ही सिया और चेतन के अफेयर का शक था. उसने अपने परिवार से सिया की बैकग्राउंड जांच कराने को भी कहा था. वहीं सिया के पिता प्रवीण गोयल ने कहा कि उन्हें अपनी बेटी और चेतन के रिश्ते की कोई जानकारी नहीं थी.
इस घटना के बाद अब लव और अरेंज दोनों तरह की शादियों में लोग सतर्क हो गए हैं. दिल्ली की तेजस डिटेक्टिव एजेंसी जैसी संस्थाएं अब पार्टनर के चरित्र, आपराधिक रिकॉर्ड और सोशल मीडिया प्रोफाइल की जांच कर रही हैं. लोग यह जानने की कोशिश करते हैं कि सामने वाले की वित्तीय स्थिति क्या है और उसके पुराने रिश्ते कौन से रहे हैं.
ऐसी जांच की कीमत निगरानी के हिसाब से 100 डॉलर से 2,000 डॉलर तक हो सकती है. भारत में प्राइवेट डिटेक्टिव का काम कानूनी है, लेकिन इन्हें निजता के अधिकार का पालन करना होता है. फोन टैपिंग या अवैध निगरानी करना गैरकानूनी है, लेकिन कानूनी तरीके से जुटाए गए सबूत अदालत में मान्य हो सकते हैं.