Lucknow में शंकराचार्य की सभा को नहीं मिली अनुमति, बोले- अगली बार आने के लिए परमिशन नहीं लेंगे

UP/Lucknow: शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने ऐलान किया है कि वह अगली बार लखनऊ आने के लिए प्रशासन से कोई अनुमति नहीं लेंगे। उनकी 81 दिनों की ‘गविष्ठि (गौरक्षार्थ धर्मयुद्ध) यात्रा’ के समापन पर 24

UP/Lucknow: शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने ऐलान किया है कि वह अगली बार लखनऊ आने के लिए प्रशासन से कोई अनुमति नहीं लेंगे। उनकी 81 दिनों की ‘गविष्ठि (गौरक्षार्थ धर्मयुद्ध) यात्रा’ के समापन पर 24 जुलाई 2026 को लखनऊ में ‘गौ गर्जना अक्षौहिणी संकल्प’ सभा होनी थी, लेकिन प्रशासन ने इसकी इजाजत नहीं दी। इस वजह से अब यह कार्यक्रम डिजिटल तरीके से आयोजित किया जाएगा।

शंकराचार्य ने बताया कि इस कार्यक्रम के लिए उन्होंने महीनों पहले आवेदन किया था और 4.64 लाख रुपये से ज्यादा का शुल्क भी जमा किया था। इसके बावजूद उन्हें समय पर अनुमति नहीं मिली। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन जानबूझकर उनके कार्यक्रम को रोकना चाहता है ताकि गौ माता के मुद्दे पर चल रहे आंदोलन को कमजोर किया जा सके।

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने उत्तर प्रदेश सरकार और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि यात्रा के दौरान उनके कार्यकर्ताओं को परेशान किया गया और उन्हें रात में रुकने की जगह नहीं दी गई। उन्होंने यहाँ तक दावा किया कि उन्हें बुलडोजर कार्रवाई की धमकी दी गई और प्रदेश की कानून व्यवस्था की तुलना ‘रावण राज’ से की।

उनकी ‘गविष्ठि यात्रा’ 3 मई 2026 को गोरखपुर से शुरू हुई थी, जो यूपी की सभी 403 विधानसभा सीटों से होते हुए पूरी हुई। इस यात्रा का मकसद गौ माता को ‘पशु’ के बजाय ‘माता’ का दर्जा दिलाना था। अब 24 जुलाई को दोपहर 12 बजे से 2 बजे तक का कार्यक्रम ऑनलाइन होगा और उन्होंने समर्थकों से लखनऊ न आने की अपील की है।

इसके अलावा शंकराचार्य ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को कानूनी नोटिस भी भेजा है। उन्होंने ट्रस्ट से सवाल किया है कि स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती को किस आधार पर शंकराचार्य मानकर समिति में शामिल किया गया और राम मंदिर में चंदे को लेकर भी सवाल उठाए हैं।