Lucknow के SGPGI में थायरॉयड की नई सर्जरी तकनीक विकसित, अब बिना अंग निकाले होगा गांठों का इलाज

Lucknow: लखनऊ के संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (SGPGI) के डॉक्टरों ने थायरॉयड की गांठों के इलाज के लिए एक नई और आधुनिक तकनीक विकसित की है। एंडोक्राइन एवं ब्रेस्ट सर्जरी विभाग ने ‘डायरेक्ट एक्सेस माइक्

Lucknow: लखनऊ के संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (SGPGI) के डॉक्टरों ने थायरॉयड की गांठों के इलाज के लिए एक नई और आधुनिक तकनीक विकसित की है। एंडोक्राइन एवं ब्रेस्ट सर्जरी विभाग ने ‘डायरेक्ट एक्सेस माइक्रोवेव एब्लेशन’ (DAMA) नाम की हाइब्रिड सर्जरी तकनीक बनाई है। इस नई पद्धति से मरीजों के थायरॉयड को सुरक्षित रखते हुए उनकी गांठों का इलाज किया जा सकेगा।

विभागाध्यक्ष प्रो. साबरेत्नम मयिलवागनन के नेतृत्व में डॉक्टरों की टीम ने इस तकनीक को तैयार किया है। इस टीम में डॉ. रजनी के. साह, डॉ. जगन्नाथ स्पंदना और रेजिडेंट डॉ. नम्रता मस्करा शामिल रहे। प्रो. मयिलवागनन ने बताया कि पुरानी माइक्रोवेव एब्लेशन तकनीक के मुकाबले DAMA में सीधे प्रभावित हिस्से तक पहुंचकर इलाज किया जाता है। इससे गले की श्वासनली, भोजन नली और खून की मुख्य नसों जैसी जरूरी चीजों को ज्यादा सुरक्षा मिलती है।

इस तकनीक का सबसे बड़ा फायदा यह है कि एक ही ऑपरेशन में गले के दोनों तरफ की गांठों का इलाज संभव है। पहले ऐसे मरीजों का थायरॉयड का कुछ हिस्सा या पूरा थायरॉयड निकालना पड़ता था, जिसके कारण उन्हें जीवनभर हार्मोन की दवाइयां लेनी पड़ती थीं। अब इस नई तकनीक से थायरॉयड सुरक्षित रहेगा और मरीजों को लंबे समय तक दवा लेने की जरूरत कम होगी।

SGPGI में अब तक सात मरीजों पर इस तकनीक का इस्तेमाल किया गया है और सभी के ऑपरेशन सफल रहे। शुरुआती नतीजों में देखा गया कि गांठों का आकार कम हुआ है और थायरॉयड ने सामान्य तरीके से काम करना जारी रखा है। इस प्रक्रिया से मरीजों की रिकवरी जल्दी हो रही है, ऑपरेशन का खर्च कम होगा और दोबारा सर्जरी की जरूरत भी नहीं पड़ेगी। यह तकनीक अल्ट्रासाउंड-गाइडेड माइक्रोवेव एब्लेशन और ओपन सर्जरी का एक सुरक्षित मेल है।