Finance: शेयर बाजार रेगुलेटर SEBI ने securitised debt instruments (SDIs) के नियमों में बड़े बदलाव का प्रस्ताव रखा है। इसका मुख्य मकसद SEBI के नियमों को RBI के फ्रेमवर्क के साथ एक जैसा बनाना है। इन बदलावों से लिस्टिंग के
Finance: शेयर बाजार रेगुलेटर SEBI ने securitised debt instruments (SDIs) के नियमों में बड़े बदलाव का प्रस्ताव रखा है। इसका मुख्य मकसद SEBI के नियमों को RBI के फ्रेमवर्क के साथ एक जैसा बनाना है। इन बदलावों से लिस्टिंग के नियम आसान होंगे और बाजार में पारदर्शिता बढ़ेगी। SEBI ने इस प्रस्ताव पर जनता से 25 मई 2026 तक सुझाव मांगे हैं।
नियमों में क्या बदलाव प्रस्तावित हैं?
SEBI ने कई अहम बदलावों की बात कही है ताकि RBI के दायरे में आने वाली कंपनियों को आसानी हो। मुख्य बदलाव इस प्रकार हैं:
| बिंदु |
प्रस्तावित बदलाव |
| सिंगल बॉरोअर कैप |
RBI रेगुलेटेड संस्थाओं के लिए 25% की लिमिट हटाई जाएगी, जिससे सिंगल एसेट डील लिस्ट हो सकेंगी। |
| डिस्क्लोजर की जिम्मेदारी |
अब एसेट पूल की परफॉरमेंस की जानकारी देने का काम Originator के बजाय Servicer करेगा। |
| SPDE गवर्नेंस |
RBI रेगुलेटेड ओरिजिनेटर का SPDE बोर्ड में केवल एक प्रतिनिधि होगा और उसके पास वीटो पावर नहीं होगी। |
| ट्रस्टी का बदलाव |
ट्रस्टी का रजिस्ट्रेशन रद्द होने पर अब ट्रांजैक्शन बंद करने के बजाय नया ट्रस्टी नियुक्त किया जाएगा। |
| इंटर-ग्रुप ट्रांजैक्शन |
एक ही ग्रुप की ओरिजिनेटर और SPDE के बीच ट्रांजैक्शन की अनुमति होगी। |
इन बदलावों से निवेशकों और कंपनियों को क्या फायदा होगा?
SEBI का मानना है कि पुराने नियमों की वजह से सिंगल एसेट वाले सिक्योरिटाइजेशन डील्स की लिस्टिंग रुकी हुई थी। अब जब ये नियम RBI के 2021 के दिशा-निर्देशों के साथ मिल जाएंगे, तो लिस्टिंग की प्रक्रिया में आने वाली रुकावटें कम होंगी। इससे मार्केट में ग्रोथ बढ़ेगी और निवेशकों को बेहतर और पारदर्शी जानकारी मिल सकेगी क्योंकि अब सर्विसर, जो सीधे कलेक्शन और मॉनिटरिंग से जुड़ा है, वह जानकारी देगा।
यह पूरा मामला क्या है और कौन शामिल है?
यह पूरी प्रक्रिया Corporate Bonds Advisory Committee (CoBoSAC) की सिफारिशों पर आधारित है। इसमें SEBI, RBI और उन कंपनियों (Originators) की भूमिका अहम है जो एसेट्स को पूल करके उन्हें सिक्योरिटीज में बदलते हैं। इन बदलावों का सीधा असर उन वित्तीय संस्थाओं पर पड़ेगा जो RBI के नियमों के तहत काम करती हैं और शेयर बाजार में अपने इंस्ट्रूमेंट्स लिस्ट करना चाहती हैं।
Frequently Asked Questions (FAQs)
SEBI ने जनता से सुझाव मांगने की आखिरी तारीख क्या रखी है?
SEBI ने इन प्रस्तावित बदलावों पर अपनी राय और सुझाव देने के लिए 25 मई 2026 तक का समय दिया है।
सिंगल बॉरोअर एक्सपोजर कैप हटाने से क्या असर पड़ेगा?
अभी 25% की लिमिट होने की वजह से सिंगल एसेट वाले डील्स लिस्ट नहीं हो पाते थे। इस कैप के हटने से ऐसी डील्स की लिस्टिंग आसान हो जाएगी।