Gulf देशों में बढ़ा तनाव, सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान ने किया डिफेंस पैक्ट साइन, US ने ईरानी बंदरगाहों की घेराबंदी की

World: खाड़ी देशों में तनाव काफी बढ़ गया है। इस बीच सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान ने मिलकर एक रक्षा समझौता किया है। साथ ही अमेरिका ने ईरान के बंदरगाहों के आसपास अपनी सैन्य घेराबंदी बढ़ा दी है, जिससे पूरे क्षेत्र में हलचल

World: खाड़ी देशों में तनाव काफी बढ़ गया है। इस बीच सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान ने मिलकर एक रक्षा समझौता किया है। साथ ही अमेरिका ने ईरान के बंदरगाहों के आसपास अपनी सैन्य घेराबंदी बढ़ा दी है, जिससे पूरे क्षेत्र में हलचल मची हुई है।

शुक्रवार, 7 अगस्त 2026 को मक्का में सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान, तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तय्यप एर्दोआन और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने ‘मक्का जॉइंट डिफेंस एग्रीमेंट’ पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते के मुताबिक, अगर इन तीनों देशों में से किसी एक पर भी हमला होता है, तो उसे तीनों पर हमला माना जाएगा। अधिकारियों ने कहा है कि यह समझौता केवल बचाव के लिए है और इसका मकसद क्षेत्रीय शांति और स्थिरता को बढ़ाना है।

दूसरी तरफ, अमेरिका ने ईरान के खिलाफ अपनी सख्ती बढ़ा दी है। रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने बताया कि ‘ऑपरेशन एपिक फ्युरी’ के तहत ईरानी बंदरगाहों से निकलने वाले जहाजों को अब अमेरिकी नौसेना की अनुमति लेनी होगी। 14 जुलाई 2026 से लागू इस नाकाबंदी के कारण ईरान के मुख्य निर्यात टर्मिनल खार्ग आइलैंड से पिछले एक हफ्ते से कोई तेल टैंकर नहीं निकला है। अमेरिकी सेना ने अब तक होर्मुज जलडमरूमध्य में 49 जहाजों का रास्ता बदला है।

इस तनाव के बीच ईरान और ओमान के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य के लिए एक शिपिंग समझौते पर बात चल रही है। ईरान के विदेश मंत्रालय ने बताया कि नए शिपिंग रूट के लिए भौगोलिक निर्देशांक तय हो गए हैं। हालांकि, ईरान का कहना है कि वह तब तक रास्ता पूरी तरह नहीं खोलेगा जब तक अमेरिका उसकी नाकाबंदी नहीं हटाता।

इन सब विवादों का असर समुद्री रास्तों पर दिख रहा है। फरवरी 2026 से शुरू हुए अमेरिकी-इजरायली और ईरानी संघर्ष के कारण जहाजों की आवाजाही बहुत कम हो गई है। 5 अगस्त 2026 को होर्मुज जलडमरूमध्य से केवल आठ जहाज गुजरे, जबकि युद्ध से पहले यहां रोजाना 130 से 140 जहाज निकलते थे। सुरक्षा जोखिमों की वजह से कई शिपिंग कंपनियां इस रास्ते से बच रही हैं, जिससे सऊदी अरब और कुवैत को अपना तेल उत्पादन कम करना पड़ा है।