Mumbai की झुग्गी से Germany तक का सफर, Santosh Yadav बने भारत के पहले GitHub Star

Maharashtra: मुंबई की झुग्गियों में रहने वाले एक साधारण युवक ने अपनी मेहनत के दम पर पूरी दुनिया में नाम कमाया है। संतोष यादव ने अपनी गरीबी और भाषा की मुश्किलों को पीछे छोड़ते हुए जर्मनी में AI टूल्स बनाने तक का सफर तय कि

Maharashtra: मुंबई की झुग्गियों में रहने वाले एक साधारण युवक ने अपनी मेहनत के दम पर पूरी दुनिया में नाम कमाया है। संतोष यादव ने अपनी गरीबी और भाषा की मुश्किलों को पीछे छोड़ते हुए जर्मनी में AI टूल्स बनाने तक का सफर तय किया है। वह भारत के पहले GitHub Star बनने वाले व्यक्ति हैं और आज दुनिया के बड़े टेक प्लेटफॉर्म्स पर अपनी पहचान बना चुके हैं।

संतोष का शुरुआती जीवन काफी संघर्षपूर्ण रहा। उन्होंने करीब 30 साल मुंबई की एक झुग्गी में बिताए। स्कूल में पढ़ाई के दौरान उन्हें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा और वह हिंदी मीडियम से पढ़े थे, जिसकी वजह से डिप्लोमा के दौरान उन्हें अंग्रेजी बोलने और समझने में परेशानी हुई। बिना किसी कंप्यूटर अनुभव के उन्होंने कंप्यूटर साइंस में डिप्लोमा चुना और धीरे-धीरे इस क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत की।

उनके करियर में बड़ा बदलाव 2019 में आया जब उन्होंने Angular और NgRx जैसे ओपन-सोर्स प्रोजेक्ट्स में काम करना शुरू किया। 13 नवंबर 2019 को उन्हें Google Developer Expert (GDE) के रूप में चुना गया। इसके बाद मार्च 2020 में GitHub ने अपना स्टार प्रोग्राम शुरू किया, जिसमें संतोष को अन्य डेवलपर्स ने नॉमिनेट किया और वह भारत के पहले GitHub Star बने। संतोष ने बताया कि अपनी प्रोफाइल पर भारतीय तिरंगा देखकर उन्हें बहुत गर्व महसूस हुआ।

संतोष ने दूसरों की मदद के लिए Lars Gyrup Brink Nielsen के साथ मिलकर ‘This Is Learning’ नाम की पहल शुरू की। साल 2022 में उन्होंने Free Code Camp के साथ मिलकर एक Angular कोर्स बनाया, जिसे 5 महीने में 4.5 लाख से ज्यादा लोगों ने देखा। साल 2023 में वह अपने परिवार के साथ जर्मनी चले गए ताकि उन्हें एक बेहतर जीवन दे सकें। उनकी बेटी, जो 8 साल तक मुंबई की झुग्गी में रही, अब 10 साल की है और जर्मनी में है।

जनवरी 2026 में संतोष जर्मनी की कंपनी CodeRabbit में Principal Developer Advocate के पद पर शामिल हुए। हाल ही में उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी और अपनी पत्नी की 14 साल पुरानी तस्वीरें साझा कीं, जिसके बाद उनकी यह कहानी इंटरनेट पर वायरल हो गई। संतोष का मानना है कि जीवन में चुनौतियां सबके सामने आती हैं, लेकिन जो उनका डटकर सामना करता है, वही मजबूत बनता है। उनका कहना है कि ओपन सोर्स में योगदान देने के लिए कभी देर नहीं होती और अगर कुछ हासिल करने का फैसला कर लिया जाए, तो उसे पाया जा सकता है।