Maharashtra में सचिन अहिर ने बदला पाला, Uddhav Thackeray की पार्टी से अलग होकर Shinde गुट में शामिल हुए

Maharashtra: उद्धव ठाकरे के बेहद करीबी माने जाने वाले सचिन अहिर ने एक बड़ा राजनीतिक कदम उठाते हुए पाला बदल लिया है। अहिर ने शिव सेना (UBT) छोड़कर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के गुट का दामन थाम लिया और महाराष्ट्र विधान परिषद

Maharashtra: उद्धव ठाकरे के बेहद करीबी माने जाने वाले सचिन अहिर ने एक बड़ा राजनीतिक कदम उठाते हुए पाला बदल लिया है। अहिर ने शिव सेना (UBT) छोड़कर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के गुट का दामन थाम लिया और महाराष्ट्र विधान परिषद के उपसभापति पद के लिए अपना नामांकन दाखिल किया। इस घटनाक्रम ने राज्य की राजनीति में एक बार फिर हलचल मचा दी है और ठाकरे गुट को बड़ा झटका लगा है।

सचिन अहिर ने उद्धव ठाकरे को भेजे अपने इस्तीफे में ‘अपरिहार्य परिस्थितियों’ का हवाला देते हुए भारतीय कामगार सेना और शिव सेना (UBT) के अपने पदों से हटने की बात कही। नामांकन के दौरान उनके साथ मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार भी मौजूद थे। वहीं, महाविकास आघाडी (MVA) ने इस पद के लिए जगन्नाथ अभ्यंकर को मैदान में उतारा है।

इस दलबदल के बाद अब उनकी सदस्यता रद्द होने या अयोग्यता (disqualification) की चर्चा तेज हो गई है। शिव सेना (UBT) के नेता अरविंद सावंत ने कहा कि यह कदम कानून के दायरे में नहीं है और संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत अहिर को अयोग्य घोषित किया जाना चाहिए। पार्टी के एमएलसी अनिल परब ने भी माना कि उपसभापति पद के लिए उनके पास वोटों की कमी है, लेकिन पार्टी इस मामले में कानूनी कार्रवाई करेगी।

दूसरी तरफ, एकनाथ शिंदे और उनके समर्थकों का कहना है कि यहाँ पार्टी बदलने का कोई सवाल ही नहीं उठता। शिंदे का तर्क है कि अहिर 2022 में ‘धनुष और बाण’ चुनाव चिह्न पर एमएलसी चुने गए थे, जो अब उनके गुट के पास है, इसलिए वह तकनीकी रूप से शिव सेना में ही हैं। पूर्व उपसभापति नीलम गोरे और राज्य विधायिका के अधिकारियों ने भी इसी बात का समर्थन किया है। उनका कहना है कि ऊपरी सदन में अहिर के शिव सेना (UBT) से जुड़े होने के कोई आधिकारिक दस्तावेज मौजूद नहीं हैं।

उदय सामंत ने स्पष्ट किया कि इस फैसले से पहले सभी कानूनी पहलुओं की अच्छे से जांच कर ली गई थी। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अगर अहिर विधान परिषद के उपसभापति चुने जाते हैं, तो उनकी अयोग्यता की कार्यवाही और ज्यादा जटिल हो सकती है।