Bihar: बिहार कृषि विश्वविद्यालय (BAU) के वैज्ञानिकों ने धान की एक नई किस्म ‘सबौर सम्राट’ तैयार की है। यह किस्म उन किसानों के लिए वरदान साबित होगी जिनके पास सिंचाई के सीमित साधन हैं। इस नई प्रजाति की सबसे बड़ी
Bihar: बिहार कृषि विश्वविद्यालय (BAU) के वैज्ञानिकों ने धान की एक नई किस्म ‘सबौर सम्राट’ तैयार की है। यह किस्म उन किसानों के लिए वरदान साबित होगी जिनके पास सिंचाई के सीमित साधन हैं। इस नई प्रजाति की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह कम पानी और खाद में भी ज्यादा पैदावार देने की क्षमता रखती है।
सबौर सम्राट धान की क्या हैं खासियतें?
बिहार कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों के अनुसार यह धान 115 से 120 दिनों में पककर तैयार हो जाता है। इस पौधे की लंबाई 90 से 95 सेंटीमीटर के बीच रहती है, जिससे फसल के गिरने का खतरा कम रहता है। इसके एक गुच्छे में 270 से 350 दाने होते हैं और 1000 दानों का वजन करीब 20 ग्राम होता है।
पैदावार और खेती का तरीका क्या होगा?
इस किस्म की औसत पैदावार 55 से 60 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक है, जबकि अधिकतम उत्पादन 90 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक दर्ज किया गया है। यह पारंपरिक धान के मुकाबले लगभग 1.5 गुना ज्यादा पैदावार देता है। यह किस्म Direct Seeding (DSR) तकनीक के लिए भी उपयुक्त है और सूखे वाले इलाकों में खेती के लिए बहुत फायदेमंद है।
किन राज्यों के किसान कर सकेंगे खेती?
केंद्र सरकार ने इसे बिहार के साथ-साथ उत्तर प्रदेश, झारखंड, असम, त्रिपुरा, पंजाब, हरियाणा और गुजरात के लिए भी उपयुक्त माना है। बिहार में इसका सफल परीक्षण कैमूर, रोहतास, बक्सर, भोजपुर, किशनगंज और पटना जैसे जिलों में किया गया है। वर्तमान में इसके बीजों का उत्पादन किया जा रहा है और अगले साल से यह किसानों को उपलब्ध होगा।
Frequently Asked Questions (FAQs)
सबौर सम्राट धान की औसत पैदावार कितनी है?
इस धान की किस्म की औसत पैदावार 55 से 60 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है, लेकिन कुछ मामलों में यह 90 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक भी पहुँच सकती है।
यह धान की किस्म किन राज्यों के लिए उपयोगी है?
यह बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड, असम, त्रिपुरा, पंजाब, हरियाणा और गुजरात के किसानों के लिए उपयुक्त बताई गई है।