UP: राम मंदिर चढ़ावे में गबन का आरोप, चंपत राय समेत 5 लोगों के खिलाफ FIR की मांग, SIT जांच शुरू

Lucknow/Ayodhya: अयोध्या के राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए धन और कीमती सामान के गबन का मामला गरमा गया है। लखनऊ के हजरतगंज थाने में सवर्ण मोर्चा ने ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और चार अन्य लोगों के खिलाफ FIR दर्ज

Lucknow/Ayodhya: अयोध्या के राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए धन और कीमती सामान के गबन का मामला गरमा गया है। लखनऊ के हजरतगंज थाने में सवर्ण मोर्चा ने ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और चार अन्य लोगों के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की है। इस मामले में राजनीतिक हलचल भी तेज है और आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने भी वित्तीय अनियमितताओं को लेकर तहरीर दी है।

उत्तर प्रदेश सरकार ने इन गंभीर आरोपों की जांच के लिए लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत की अगुवाई में तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है। इस टीम में आईजी किरण एस. और वित्त विभाग के विशेष सचिव नीलरतन कुमार भी शामिल हैं। SIT पिछले चार दिनों से अयोध्या में मौजूद है और ट्रस्ट के सदस्यों समेत करीब 100 कर्मचारियों से पूछताछ कर चुकी है। जांच टीम सीसीटीवी फुटेज और बैंक खातों के दस्तावेजों को खंगाल रही है और दानपात्रों का भौतिक निरीक्षण भी किया गया है।

इस विवाद का असर अब मंदिर आने वाले लोगों पर भी दिखने लगा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, गबन की खबरों के बाद श्रद्धालुओं की संख्या और चढ़ावे में बड़ी गिरावट आई है। जो औसत दान हर महीने 7 करोड़ रुपये से ज्यादा होता था, वह पिछले दो हफ्तों में घटकर करीब 1.5 करोड़ रुपये रह गया है। वहीं, इस पूरे मामले को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में एक जनहित याचिका भी दायर की गई है, जिस पर 22 जून को सुनवाई होगी।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 19 जून को अयोध्या का दौरा किया और 291 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं का लोकार्पण किया। उन्होंने साफ कहा कि SIT की जांच के बाद जो भी सच सामने आएगा, उसके आधार पर कार्रवाई होगी और किसी को बख्शा नहीं जाएगा। इस दौरान जिला प्रशासन के अनुरोध पर चंपत राय मुख्यमंत्री के कार्यक्रम से दूर रहे।

श्रीराम जन्मभूमि निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने स्वीकार किया कि प्रबंधन और निगरानी में कमी रही है। उन्होंने सुझाव दिया है कि मंदिर के दैनिक हिसाब-किताब को वेबसाइट पर सार्वजनिक किया जाना चाहिए और प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए एक वरिष्ठ अधिकारी को CEO नियुक्त करना चाहिए।