Bihar और UP : राम जन्मभूमि अयोध्या से जानकी जन्मभूमि सीतामढ़ी तक की यात्रा अब और आसान हो जाएगी। केंद्र सरकार अयोध्या से सीतामढ़ी के बीच 4 लेन का हाईवे बना रही है, जिसे ‘राम जानकी पथ’ नाम दिया गया है। बिहार मे
Bihar और UP : राम जन्मभूमि अयोध्या से जानकी जन्मभूमि सीतामढ़ी तक की यात्रा अब और आसान हो जाएगी। केंद्र सरकार अयोध्या से सीतामढ़ी के बीच 4 लेन का हाईवे बना रही है, जिसे ‘राम जानकी पथ’ नाम दिया गया है। बिहार में इस प्रोजेक्ट के लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया तेज कर दी गई है और सर्वे का काम शुरू हो चुका है।
राम जानकी पथ प्रोजेक्ट की मुख्य बातें क्या हैं?
यह हाईवे लगभग 240 किलोमीटर लंबा होगा, जो अयोध्या के राम मंदिर को सीतामढ़ी के पुनौरा धाम से जोड़ेगा। इस प्रोजेक्ट पर करीब 6,155 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। यह रास्ता सीवान, सारण, पूर्वी चंपारण, शिवहर और सीतामढ़ी जैसे जिलों से होकर गुजरेगा। इससे धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर खुलेंगे।
जमीन अधिग्रहण और निर्माण की समय सीमा क्या है?
उत्तर प्रदेश के सभी जिलों में जमीन अधिग्रहण का काम पूरा हो चुका है। बिहार में मेहरौना घाट से मसरख तक का काम पूरा है और बाकी हिस्सों के लिए पांच सदस्यीय कमेटी सर्वे कर रही है। अगले एक महीने में जमीन का वर्गीकरण पूरा होने की उम्मीद है। इस प्रोजेक्ट के अलग-अलग हिस्से मई 2026 से दिसंबर 2027 के बीच पूरे किए जाएंगे। सीवान और मसरख के बीच का 50.12 किलोमीटर का हिस्सा नवंबर 2026 तक तैयार होने का लक्ष्य है।
प्रोजेक्ट में कौन-कौन से हाईवे शामिल हैं?
इस नेशनल हाईवे प्रोजेक्ट में NH-27 (अयोध्या से छवानी), NH-227A (छवानी से चकिया और सीवान से मसरख) और NH-227 (चकिया से भीतमोरे) के हिस्से शामिल हैं। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के मंत्री नितिन गडकरी ने इस प्रोजेक्ट की प्रगति की जानकारी दी है। NHAI और बिहार सरकार मिलकर इस काम को पूरा कर रहे हैं।
Frequently Asked Questions (FAQs)
राम जानकी पथ की कुल लंबाई और लागत कितनी है?
इस हाईवे की कुल लंबाई लगभग 240 किलोमीटर है और इसे बनाने में करीब 6,155 करोड़ रुपये का खर्च आने का अनुमान है।
यह हाईवे बिहार के किन जिलों से होकर गुजरेगा?
यह रास्ता बिहार के सीवान, सारण, पूर्वी चंपारण, शिवहर और सीतामढ़ी जिलों से होकर गुजरेगा।
प्रोजेक्ट का काम कब तक पूरा होगा?
बिहार में इस प्रोजेक्ट के पूरा होने की उम्मीद दिसंबर 2027 तक है, जबकि कुछ हिस्से नवंबर 2026 तक तैयार हो जाएंगे।