Rajasthan और Haryana के बीच हुआ यमुना जल समझौता, 34,102 करोड़ की पाइपलाइन से चूरू तक पहुंचेगा पानी

Rajasthan/Haryana: राजस्थान और हरियाणा के बीच करीब 32 साल पुराना यमुना जल विवाद अब सुलझ गया है। दिल्ली में हुए एक ऐतिहासिक समझौते के तहत हरियाणा के हथिनीकुंड से राजस्थान के चूरू तक एक लंबी पाइपलाइन बिछाई जाएगी। इस प्रोजे

Rajasthan/Haryana: राजस्थान और हरियाणा के बीच करीब 32 साल पुराना यमुना जल विवाद अब सुलझ गया है। दिल्ली में हुए एक ऐतिहासिक समझौते के तहत हरियाणा के हथिनीकुंड से राजस्थान के चूरू तक एक लंबी पाइपलाइन बिछाई जाएगी। इस प्रोजेक्ट से राजस्थान के शेखावाटी क्षेत्र के करोड़ों लोगों को पीने का पानी और सिंचाई के लिए सुविधा मिलेगी।

29 जून 2026 को दिल्ली में राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने इस मेमोरेंडम ऑफ एग्रीमेंट (MoA) पर हस्ताक्षर किए। इस मौके पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल भी मौजूद थे। इस समझौते के बाद राजस्थान को 1994 के पुराने समझौते के मुताबिक 1917 क्यूसेक पानी मिलना सुनिश्चित होगा।

इस पूरी परियोजना की कुल लागत 34,102 करोड़ रुपये आएगी, जिसका खर्च राजस्थान सरकार उठाएगी और इसके लिए केंद्र सरकार से मदद मांगी जाएगी। पानी को पहुंचाने के लिए 295.5 किलोमीटर लंबी भूमिगत पाइपलाइन बिछाई जाएगी। यह पाइपलाइन हरियाणा के पांच जिलों- यमुनानगर, कुरुक्षेत्र, कैथल, जींद और हिसार से होकर गुजरेगी।

विवरण जानकारी
पाइपलाइन की लंबाई 295.5 किलोमीटर
कुल लागत 34,102 करोड़ रुपये
लाभान्वित क्षेत्र चूरू, सीकर और झुंझुनू (शेखावाटी)
पानी की मात्रा 1917 क्यूसेक (मानसून अवधि में)
पाइपलाइन का व्यास 3.6 मीटर (तीन पाइपलाइनें)
तकनीक हाइब्रिड मोड (गुरुत्वाकर्षण और पंपिंग)

पाइपलाइन के जरिए जुलाई से अक्टूबर के बीच मानसून के समय अधिकतम 577 मिलियन क्यूबिक मीटर (MCM) पानी की आपूर्ति की जाएगी। चूंकि हथिनीकुंड और चूरू के बीच ऊंचाई में करीब 110 मीटर का अंतर है, इसलिए पानी को पंपिंग और गुरुत्वाकर्षण दोनों तरीकों से भेजा जाएगा। इस पूरे सिस्टम को चलाने और इसकी देखरेख के लिए दोनों राज्य मिलकर एक स्पेशल पर्पस व्हीकल (SPV) कंपनी बनाएंगे।