US और Iran के बीच बातचीत की कोशिश, Qatar ने दिया समर्थन लेकिन तनाव के बीच फिर बंद हुआ Strait of Hormuz
World: अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चल रहे विवाद को सुलझाने के लिए कतर ने एक बार फिर बातचीत का समर्थन किया है। कतर का मानना है कि शांतिपूर्ण बातचीत और कूटनीति ही पश्चिम एशिया में स्थिरता लाने का एकमात्र रास्ता है।
World: अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चल रहे विवाद को सुलझाने के लिए कतर ने एक बार फिर बातचीत का समर्थन किया है। कतर का मानना है कि शांतिपूर्ण बातचीत और कूटनीति ही पश्चिम एशिया में स्थिरता लाने का एकमात्र रास्ता है। इस बीच, दोनों देशों के बीच हुए एक समझौते के बावजूद तनाव फिर से बढ़ गया है।
19 जून 2026 को कतर के प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुल रहमान अल थानी ने स्विट्जरलैंड में स्विस विदेश मंत्री इग्नाज़ियो कैसिस से मुलाकात की। इस मीटिंग के दौरान उन्होंने अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत शुरू करने के लिए अपना पूरा समर्थन दिया। कतर का कहना है कि इस तरह के प्रयासों से क्षेत्रीय सुरक्षा बढ़ेगी और दुनिया के आम लोगों के हित में नए रास्ते खुलेंगे।
इससे पहले 17 जून 2026 को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की मध्यस्थता में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने ‘इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन’ (MoU) पर हस्ताक्षर किए थे। इस समझौते का मकसद फरवरी में शुरू हुए संघर्ष को खत्म करना और Strait of Hormuz को फिर से खोलना था। कतर ने इस MoU को स्थिरता की दिशा में पहला कदम बताया था।
हालात तब बिगड़ गए जब 20 जून 2026 को ईरान ने Strait of Hormuz को फिर से बंद करने का फैसला किया। ईरान का आरोप है कि अमेरिका और इजरायल ने समझौते की शर्तों का उल्लंघन किया है। वहीं, ईरान के एक वरिष्ठ lawmaker इब्राहिम अजीजी ने चेतावनी दी है कि अगर वॉशिंगटन ने अपनी प्रतिबद्धताएं पूरी नहीं कीं, तो उसे इसकी भारी कीमत चुकानी होगी।
इन सबके बीच, 21 जून 2026 को स्विट्जरलैंड में तकनीकी बातचीत फिर से शुरू होने की उम्मीद है। इसमें पाकिस्तान और कतर मध्यस्थ की भूमिका निभाएंगे। इस बातचीत का मुख्य लक्ष्य ईरान के परमाणु कार्यक्रम जैसे मुद्दों को सुलझाना है, जिन्हें पिछले MoU में शामिल नहीं किया गया था। अमेरिकी विशेष दूत जेरेड कुशनर और स्टीव विटकॉफ इस चर्चा के लिए पहले से ही स्विट्जरलैंड पहुंच चुके हैं।