US और Iran के बीच बातचीत की कोशिश, Qatar ने दिया समर्थन, लेकिन स्विट्जरलैंड में होने वाली मीटिंग टली

World : अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने के लिए कतर ने एक बार फिर बातचीत का समर्थन किया है। कतर का मानना है कि बातचीत और शांतिपूर्ण कूटनीति ही पश्चिम एशिया में स्थिरता लाने और क्षेत्रीय मुद्दों को सुलझाने का सही रास्त

World : अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने के लिए कतर ने एक बार फिर बातचीत का समर्थन किया है। कतर का मानना है कि बातचीत और शांतिपूर्ण कूटनीति ही पश्चिम एशिया में स्थिरता लाने और क्षेत्रीय मुद्दों को सुलझाने का सही रास्ता है।

हाल ही में 20 जून 2026 को कतर ने अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत की अपनी मंजूरी दोहराई। हालांकि, स्विट्जरलैंड में होने वाली तकनीकी बातचीत के पहले दौर को फिलहाल टाल दिया गया है। यह फैसला दोनों पक्षों के बीच एक समझौते (MoU) पर हस्ताक्षर होने के बाद लिया गया।

इससे पहले 19 जून को कतर के प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमन अल थानी ने स्विट्जरलैंड के विदेश मंत्री इग्नाज़ियो कैसिस से मुलाकात की थी। इस दौरान उन्होंने साफ किया कि दोहा बातचीत के जरिए स्थायी समाधान निकालने के लिए पूरी तरह तैयार है। स्विट्जरलैंड के विदेश मंत्रालय ने भी पुष्टि की है कि अमेरिका, ईरान, कतर और पाकिस्तान की बैठक टल गई है, लेकिन वे इसे कराने के लिए अब भी तैयार हैं।

इस पूरी प्रक्रिया में पाकिस्तान की अहम भूमिका रही है। 18 जून 2026 को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने ‘इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन’ (MoU) पर डिजिटल हस्ताक्षर किए। इस समझौते में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने मध्यस्थता की। इस MoU का मुख्य मकसद 28 फरवरी 2026 से शुरू हुए संघर्ष को खत्म करना और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोलना है।

अमेरिका की ओर से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की टीम के वरिष्ठ सदस्य जेरेड कुशनर और विशेष दूत स्टीव विटकॉफ स्विट्जरलैंड पहुँच चुके हैं। वहीं ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगायी ने बताया कि बातचीत के अगले चरण के लिए मध्यस्थों के साथ चर्चा जारी है।

इस समझौते का दुनिया भर के कई देशों ने स्वागत किया है। जापान, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और कई यूरोपीय देशों ने पाकिस्तान और कतर की कोशिशों की तारीफ की। इन देशों का कहना है कि इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था को स्थिरता मिलेगी और होर्मुज जलडमरूमध्य खुलने से व्यापार में आसानी होगी। साथ ही यह भी कहा गया कि ईरान को परमाणु हथियार नहीं बनाने चाहिए और इसके बदले में प्रतिबंध हटाए जा सकते हैं।