Maharashtra: पुणे और मुंबई जैसे बड़े शहरों में वोटर लिस्ट को अपडेट करने का काम काफी धीरे चल रहा है। चुनाव आयोग की प्री-SIR मैपिंग प्रक्रिया में ये शहर पिछड़ गए हैं, जिससे समय पर वोटर लिस्ट तैयार होने में दिक्कत आ सकती है
Maharashtra: पुणे और मुंबई जैसे बड़े शहरों में वोटर लिस्ट को अपडेट करने का काम काफी धीरे चल रहा है। चुनाव आयोग की प्री-SIR मैपिंग प्रक्रिया में ये शहर पिछड़ गए हैं, जिससे समय पर वोटर लिस्ट तैयार होने में दिक्कत आ सकती है। अधिकारियों के मुताबिक, शहरों में लोगों का एक जगह से दूसरी जगह जाना और मैनपावर की कमी इस देरी की मुख्य वजह है।
वोटर मैपिंग में अब तक कितनी प्रगति हुई है?
महाराष्ट्र में कुल 9.88 करोड़ वोटरों में से लगभग 6.56 करोड़ की मैपिंग पूरी हो चुकी है, जो कुल मिलाकर 66.42% है। लेकिन मुंबई और पुणे की हालत अलग है। मुंबई सबअर्बन जिले में सिर्फ 36.31% काम पूरा हुआ है, जबकि मुंबई सिटी में यह आंकड़ा 51.40% है। पुणे जिले में 17 अप्रैल तक करीब 36% काम हुआ था, जिसे बढ़ाकर 60-70% तक ले जाने की कोशिश की जा रही है।
क्या है यह प्री-SIR मैपिंग प्रक्रिया और इसके नियम?
इस प्रक्रिया में BLO (Block Level Officers) मौजूदा वोटर लिस्ट की तुलना 2002 की पुरानी वोटर लिस्ट से करते हैं। यह सिर्फ डेटा मिलाने का काम है, अभी घर-घर जाकर वेरिफिकेशन नहीं किया जा रहा है। अगर किसी नए युवा वोटर का नाम 2002 की लिस्ट में नहीं है, तो उसे यह साबित करना होगा कि उसके माता-पिता का नाम उस समय की लिस्ट में शामिल था।
काम धीमा होने के पीछे क्या कारण हैं?
मुख्य चुनाव अधिकारी S. Chockalingam ने बताया कि मुंबई जैसे शहरों में लोग बहुत ज्यादा शिफ्ट होते हैं, जिससे डेटा मैच करना मुश्किल हो रहा है। साथ ही, पोलिंग बूथों की संख्या बढ़ने और कर्मचारियों की कमी ने भी काम को धीमा कर दिया है। मुंबई में 10,000 कर्मचारियों की जरूरत थी, लेकिन फिलहाल करीब 7,000 स्टाफ ही तैनात है। BMC ने राजनीतिक दलों से भी अपील की है कि वे अपने BLA (Booth Level Agents) नियुक्त करें ताकि काम तेजी से और पारदर्शिता के साथ पूरा हो सके।
Frequently Asked Questions (FAQs)
प्री-SIR मैपिंग का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इसका उद्देश्य मौजूदा वोटर लिस्ट का 2002 की पुरानी लिस्ट से मिलान करना है ताकि मतदाताओं की सही पहचान और वेरिफिकेशन किया जा सके।
मुंबई और पुणे में काम धीमा होने की क्या वजह है?
शहरों में जनसंख्या का पलायन (Migration), पोलिंग बूथों की बढ़ती संख्या और BLO कर्मचारियों की कमी के कारण काम की रफ्तार धीमी है।