Pune के ILS Law कॉलेज के छात्रों को बड़ी राहत, कम अटेंडेंस के बाद भी दे सकेंगे एग्जाम

Maharashtra: पुणे के ILS Law कॉलेज के उन छात्रों के लिए बड़ी खुशखबरी आई है जिन्हें कम अटेंडेंस की वजह से सेमेस्टर एग्जाम देने से रोक दिया गया था। बॉम्बे हाई कोर्ट ने सोमवार को इन छात्रों को एक बार के लिए परीक्षा में बैठन

Maharashtra: पुणे के ILS Law कॉलेज के उन छात्रों के लिए बड़ी खुशखबरी आई है जिन्हें कम अटेंडेंस की वजह से सेमेस्टर एग्जाम देने से रोक दिया गया था। बॉम्बे हाई कोर्ट ने सोमवार को इन छात्रों को एक बार के लिए परीक्षा में बैठने की अनुमति दे दी है। कोर्ट ने इसे ‘स्ट्रिक्टली वन-टाइम मेजर’ यानी केवल एक बार की राहत बताया है।

यह फैसला सुप्रीम कोर्ट द्वारा 21 जुलाई 2026 को दिए गए एक आदेश पर आधारित है। सुप्रीम कोर्ट ने उन छात्रों को सुरक्षा दी थी जो नवंबर 2025 के दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले के समय अपने सेशन के बीच में थे। बॉम्बे हाई कोर्ट के जस्टिस आर.आई. चागला और जस्टिस फरहान पी. दुबाश ने इस मामले की सुनवाई की और छात्रों के पक्ष में फैसला सुनाया।

कोर्ट ने साफ किया कि यह राहत केवल एकेडमिक साल 2025-26 के लिए है और इससे अटेंडेंस के नियमों में कोई स्थायी बदलाव नहीं हुआ है। आने वाले समय में छात्रों को नियमित रूप से अटेंडेंस पूरी करनी होगी। कॉलेज और यूनिवर्सिटी को निर्देश दिया गया है कि वे इस फैसले के बाद चार हफ्ते के भीतर सप्लीमेंट्री परीक्षाएं आयोजित करें।

नियमों की बात करें तो Bar Council of India (BCI) के मुताबिक वकील के रूप में रजिस्ट्रेशन के लिए हर विषय में 70% अटेंडेंस जरूरी है। वहीं सावित्रीबाई फुले पुणे यूनिवर्सिटी के नियमों में भी अटेंडेंस की अनिवार्यता है। हाई कोर्ट ने कहा कि यह राहत उन सभी छात्रों को मिलेगी जो इसी तरह की स्थिति में हैं, चाहे वे फाइनल ईयर के हों या नहीं। इस मामले में वरिष्ठ वकील शिराज रुस्तमजी और शरद बंसल ने एमिकस क्यूरी के तौर पर मदद की।