Lucknow में डॉक्टरों ने दी चेतावनी, महिलाओं में ज्यादा है पल्मोनरी हाइपरटेंशन का खतरा, समय पर जांच है जरूरी
Lucknow: राजधानी लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में पल्मोनरी हाइपरटेंशन (PH) को लेकर एक बड़ा अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ‘पीएच समिट लखनऊ 2026’ आयोजित किया गया। 8 और 9 अगस्त को हुए इस मंथन में देश और व
Lucknow: राजधानी लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में पल्मोनरी हाइपरटेंशन (PH) को लेकर एक बड़ा अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ‘पीएच समिट लखनऊ 2026’ आयोजित किया गया। 8 और 9 अगस्त को हुए इस मंथन में देश और विदेश के बड़े विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। डॉक्टरों ने बताया कि इस बीमारी की पहचान में अक्सर बहुत देरी हो जाती है, जिससे मरीज की हालत गंभीर हो जाती है।
विशेषज्ञों के मुताबिक पुरुषों के मुकाबले महिलाओं में पल्मोनरी हाइपरटेंशन का खतरा 2 से 4 गुना ज्यादा होता है। यह समस्या खासकर 30 से 60 साल की उम्र के लोगों में ज्यादा देखी जा रही है। डॉक्टरों का मानना है कि हार्मोनल बदलाव या ऑटोइम्यून बीमारियां इसकी वजह हो सकती हैं। सबसे चिंता की बात यह है कि इस बीमारी का पता चलने में औसतन दो साल की देरी होती है। करीब 70 से 80 प्रतिशत मरीजों में बीमारी तब पकड़ी जाती है जब वे बहुत गंभीर स्थिति में पहुंच चुके होते हैं।
अगर आप या आपके परिवार में किसी को नीचे दिए गए लक्षण दिख रहे हैं, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें:
- सांस फूलना (यह सबसे पहला और मुख्य संकेत है)
- जल्दी थकान और कमजोरी महसूस होना
- सीने में दर्द या चक्कर आना
- पैरों या पेट में सूजन आना
- सूखी खांसी या खांसी के साथ खून आना
- होंठ या त्वचा का नीला पड़ना
KGMU के पल्मोनरी एवं क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. वेद प्रकाश ने कहा कि इस समिट का मकसद नई रिसर्च और इलाज के तरीकों को मरीजों तक पहुंचाना है। सम्मेलन में अमेरिका और आयरलैंड के विशेषज्ञों सहित डॉ. अमित आनंद, डॉ. दिगंबर बेहरा और डॉ. ध्रुव चौधरी जैसे कई नामी डॉक्टर शामिल थे। इलाज के लिए दवाओं से लेकर गंभीर मामलों में हार्ट-लंग ट्रांसप्लांटेशन तक के विकल्पों पर चर्चा हुई। 9 अगस्त को डॉक्टरों के लिए इकोकार्डियोग्राफी और राइट हार्ट कैथीटेराइजेशन जैसी तकनीकों की ट्रेनिंग भी दी गई।