Philippines में उपराष्ट्रपति Sara Duterte की मुश्किलें बढ़ीं, बैंक रिकॉर्ड्स मांगने पर 20 जुलाई तक टला फैसला

World : फिलीपींस की उपराष्ट्रपति Sara Duterte के खिलाफ चल रहा महाभियोग (Impeachment) मामला अब एक अहम मोड़ पर पहुंच गया है। वहां की सीनेट कोर्ट ने इस बात पर अपना फैसला 20 जुलाई 2026 तक के लिए टाल दिया है कि क्या उपराष्ट्र

World : फिलीपींस की उपराष्ट्रपति Sara Duterte के खिलाफ चल रहा महाभियोग (Impeachment) मामला अब एक अहम मोड़ पर पहुंच गया है। वहां की सीनेट कोर्ट ने इस बात पर अपना फैसला 20 जुलाई 2026 तक के लिए टाल दिया है कि क्या उपराष्ट्रपति के बैंक रिकॉर्ड और वित्तीय दस्तावेजों को मंगवाया जाना चाहिए। यह मामला देश की राजनीति के लिए बहुत बड़ा माना जा रहा है क्योंकि इसका असर भविष्य की सरकार पर पड़ सकता है।

इस मुकदमे की शुरुआत 6 जुलाई 2026 को हुई थी और सीनेट ने इसकी कार्यवाही के लिए कुल 92 दिन तय किए हैं। 15 जुलाई को हुई सुनवाई के छठे दिन किसी गवाह को नहीं बुलाया गया, बल्कि पूरा ध्यान केवल बैंक रिकॉर्ड और टैक्स रिटर्न जैसे दस्तावेजों को मंगवाने की कानूनी बहस पर रहा। सीनेटर फ्रांसिस एस्कुडेरो की अध्यक्षता वाली कोर्ट ने कहा कि मामला काफी उलझा हुआ है, इसलिए दोनों पक्षों के कागजों को ठीक से पढ़ने के लिए और समय चाहिए।

अभियोजन पक्ष (Prosecution) का कहना है कि भ्रष्टाचार और संपत्ति के आरोपों की जांच के लिए बैंक रिकॉर्ड जरूरी हैं। वहीं, बचाव पक्ष के वकील माइकल पोआ ने इसे गलत तरीका बताया और कहा कि यह केवल जानकारी जुटाने की कोशिश है, जो कानूनी प्रक्रिया के खिलाफ है। उनका तर्क है कि मांगे गए दस्तावेज पिछले 20 साल के हैं, जबकि महाभियोग केवल उस समय के कामों पर होना चाहिए जब व्यक्ति पद पर था।

इस पूरे मामले की मुख्य बातें नीचे दी गई हैं:

विवरण जानकारी
फैसले की तारीख 20 जुलाई 2026
मुख्य मुद्दा बैंक रिकॉर्ड और टैक्स दस्तावेजों की मांग
कुल सुनवाई के दिन 92 दिन
सजा का प्रावधान पद से हटाना और भविष्य में चुनाव लड़ने पर रोक
दोषसिद्धि के लिए वोट सीनेट के 24 सदस्यों में से कम से कम 16 वोट
मुख्य आरोप फंड का गलत इस्तेमाल और संपत्ति की गलत जानकारी

20 जुलाई को सीनेट के सदस्यों द्वारा वोटिंग की जाएगी, जिससे तय होगा कि बैंक रिकॉर्ड मंगवाए जाएंगे या नहीं। अगर उपराष्ट्रपति Sara Duterte को दोषी पाया जाता है, तो उन्हें अपने पद से हाथ धोना पड़ेगा और वह जीवनभर किसी भी सरकारी पद पर नहीं बैठ सकेंगी।