Philippines में कर्ज का बढ़ा बोझ, राष्ट्रपति मारकोस जूनियर के कार्यकाल में रिकॉर्ड 18.49 ट्रिलियन पहुंचा सरकारी कर्ज
Finance: फिलीपिंस के राष्ट्रपति फर्डिनेंड मारकोस जूनियर के शासनकाल में देश का विदेशी और घरेलू कर्ज बहुत तेजी से बढ़ा है। Ibon Foundation की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले 40 सालों में मारकोस जूनियर सबसे ज्यादा कर्ज लेने वा
Finance: फिलीपिंस के राष्ट्रपति फर्डिनेंड मारकोस जूनियर के शासनकाल में देश का विदेशी और घरेलू कर्ज बहुत तेजी से बढ़ा है। Ibon Foundation की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले 40 सालों में मारकोस जूनियर सबसे ज्यादा कर्ज लेने वाले राष्ट्रपति बन गए हैं। यह खबर अब वहां के आर्थिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई है कि क्या इतना ज्यादा कर्ज लेना देश की अर्थव्यवस्था के लिए सही है।
Ibon Foundation ने बताया कि जून 2022 से फरवरी 2025 के बीच देश के कुल कर्ज में 30% की बढ़ोतरी हुई है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि मारकोस प्रशासन में कर्ज बढ़ने की रफ्तार पिछले कई राष्ट्रपति जैसे अरोयो, नोय नोय एक्विनो और ड्युतेर्टे से कहीं ज्यादा रही है। सबसे चिंता की बात यह है कि लिए गए कर्ज का एक बड़ा हिस्सा पुराने कर्ज को चुकाने में ही जा रहा है, जिससे आम जनता के जीवन स्तर पर कोई खास असर नहीं दिख रहा है।
वहीं दूसरी तरफ, फिलीपिंस की सरकार और वित्त विभाग (DOF) का कहना है कि यह कर्ज नियंत्रण में है। राष्ट्रपति मारकोस जूनियर ने इसे एक बिजनेस की तरह बताया है, जहां विस्तार के लिए लोन लिया जाता है ताकि लोगों के लिए नए प्रोजेक्ट्स और विकास कार्य किए जा सकें। सरकार का लक्ष्य 2028 तक कर्ज और जीडीपी के अनुपात (Debt-to-GDP ratio) को 60% से नीचे लाना है।
कर्ज से जुड़ी अहम जानकारियां नीचे दी गई तालिका में देखें:
| विवरण | आंकड़ा / जानकारी |
|---|---|
| कुल कर्ज (मार्च 2026 तक) | P18.49 ट्रिलियन |
| कुल कर्ज (मई 2026 तक) | USD 300.8 बिलियन |
| कर्ज-जीडीपी अनुपात (मार्च 2026) | 65.2% |
| 2026 बजट में कर्ज भुगतान के लिए राशि | P987.7 बिलियन |
| घरेलू कर्ज का हिस्सा (अप्रैल 2025) | 69.2% |
| विदेशी कर्ज का हिस्सा (अप्रैल 2025) | 30.8% |
ब्यूरो ऑफ ट्रेजरी (BTr) के अनुसार, मार्च 2026 में कर्ज बढ़ने की मुख्य वजह अमेरिकी डॉलर के मुकाबले फिलीपिंस की मुद्रा (Peso) की कीमत गिरना और घरेलू सिक्योरिटीज जारी करना रहा है। सरकार अब घरेलू कर्ज को प्राथमिकता दे रही है ताकि विदेशी मुद्रा के उतार-चढ़ाव से बचा जा सके।