Bihar: पटना के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल PMCH के माइक्रोबायोलॉजी विभाग में सोमवार दोपहर को अचानक भीषण आग लग गई। इस घटना के कारण अस्पताल परिसर में काफी अफरा-तफरी मच गई। आग इतनी तेज थी कि विभाग का एक पूरा कमरा जलकर राख हो ग
Bihar: पटना के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल PMCH के माइक्रोबायोलॉजी विभाग में सोमवार दोपहर को अचानक भीषण आग लग गई। इस घटना के कारण अस्पताल परिसर में काफी अफरा-तफरी मच गई। आग इतनी तेज थी कि विभाग का एक पूरा कमरा जलकर राख हो गया, हालांकि राहत की बात यह रही कि इस हादसे में कोई घायल या हताहत नहीं हुआ है।
आग कैसे लगी और कितना नुकसान हुआ?
यह घटना सोमवार दोपहर करीब 2 बजे हुई, जिसकी सूचना फायर कंट्रोल रूम को 2:10 बजे मिली। PMCH के अधीक्षक प्रोफेसर राजीव कुमार सिंह ने बताया कि शुरुआती जांच में आग का कारण शॉर्ट सर्किट लग रहा है। आग की वजह से विभाग के फ्रीजर, एयर कंडीशनर, लैब के रसायन, फर्नीचर और जरूरी सरकारी दस्तावेज जल गए। अधिकारियों के मुताबिक नुकसान का अनुमान 1.5 करोड़ रुपये से ज्यादा का है।
मरीजों की सुविधाओं पर क्या असर पड़ा?
इस आग ने अस्पताल की महत्वपूर्ण सेवाओं को चोट पहुंचाई है। माइक्रोबायोलॉजी विभाग का वह कार्यालय पूरी तरह जल गया है जहां HIV वायरल लोड टेस्ट किया जाता था। इस वजह से HIV के मरीजों के लिए जरूरी जांच सेवाएं अब बाधित हो गई हैं। जिला फायर कमांडेंट रितेश पांडेय ने बताया कि आग बुझाने के लिए पांच दमकल गाड़ियां भेजी गई थीं, जिन्होंने करीब 30 मिनट से एक घंटे की मेहनत के बाद आग पर काबू पाया।
अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
PMCH में पिछले दो महीनों के भीतर आग लगने की यह तीसरी घटना है। इससे पहले अप्रैल में पैथोलॉजी विभाग और प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग की पुरानी बिल्डिंग में भी आग लगी थी। फायर विभाग के अनुसार अस्पताल में अग्निशमन व्यवस्था काफी कम है, इसीलिए वहां एक फायर टेंडर को स्थायी रूप से तैनात रखा गया है। प्रशासन ने अब इस पूरी घटना की विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं।
Frequently Asked Questions (FAQs)
PMCH में आग लगने से क्या नुकसान हुआ है?
इस आग में माइक्रोबायोलॉजी विभाग का एक कमरा जल गया, जिसमें फ्रीजर, एसी, लैब रसायन और दस्तावेज नष्ट हो गए। अनुमानित नुकसान 1.5 करोड़ रुपये से अधिक है।
क्या इस घटना से मरीजों की जांच पर असर पड़ा है?
हां, HIV वायरल लोड परीक्षण करने वाला कार्यालय पूरी तरह जल गया है, जिससे इस बीमारी से जुड़े मरीजों की नैदानिक सेवाएं बाधित हो गई हैं।