Bihar में सिर्फ ब्रेथ एनालाइजर रिपोर्ट के आधार पर नौकरी छीनना अवैध, पटना High Court से बर्खास्त पुलिसकर्मी को राहत
Bihar: पटना High Court ने एक बड़ा फैसला सुनाते हुए कहा है कि केवल ब्रेथ एनालाइजर रिपोर्ट के आधार पर किसी पुलिसकर्मी को नौकरी से निकालना गैरकानूनी है। कोर्ट ने यह आदेश एक बर्खास्त पुलिसकर्मी को राहत देते हुए दिया है, जिसन
Bihar: पटना High Court ने एक बड़ा फैसला सुनाते हुए कहा है कि केवल ब्रेथ एनालाइजर रिपोर्ट के आधार पर किसी पुलिसकर्मी को नौकरी से निकालना गैरकानूनी है। कोर्ट ने यह आदेश एक बर्खास्त पुलिसकर्मी को राहत देते हुए दिया है, जिसने मोतिहारी पुलिस लाइन की रिजर्व फोर्स में 32 साल तक अपनी सेवा दी थी।
Chief Justice Meenakshi Madan Rai और Justice Soni Srivastava की बेंच ने स्पष्ट किया कि शराब पीने के आरोप को साबित करने के लिए ठोस और भरोसेमंद सबूत चाहिए। कोर्ट ने कहा कि सिर्फ ब्रेथ एनालाइजर की रिपोर्ट को अंतिम सबूत नहीं माना जा सकता। अगर मामले में ब्लड या यूरिन टेस्ट की रिपोर्ट नहीं है, तो जांच के नतीजों को कानूनी तौर पर सही नहीं ठहराया जा सकता।
अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के एक पुराने फैसले का भी हवाला दिया, जिसमें कहा गया था कि शराब की गंध आना, लड़खड़ाकर चलना या बोलने में दिक्कत होना शराब पीने का पक्का सबूत नहीं होते। इसके लिए मेडिकल जांच जरूरी है। साथ ही कोर्ट ने बिहार गवर्नमेंट सर्वेंट्स (क्लासिफिकेशन, कंट्रोल एंड अपील) रूल्स, 2005 के नियम 17(14) का जिक्र करते हुए कहा कि सजा देने से पहले कर्मचारी की बात और उसके बचाव के तर्कों पर गौर करना जरूरी है।
यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी पटना High Court ने कई बार इसी तरह के फैसले दिए हैं। जून 2025 में मनोज कुमार ठाकुर के मामले में और जुलाई 2025 में बिहार मिलिट्री पुलिस के एक क्लास IV कर्मचारी की बर्खास्तगी को इसी आधार पर रद्द किया गया था। फरवरी 2025 और जून 2024 में भी अदालत ने माना था कि ब्रेथ एनालाइजर रिपोर्ट शराब पीने का निर्णायक सबूत नहीं होती।