Patna में ई-रिक्शा की बैटरी रिमोटली लॉक कर रहे शरारती तत्व, बीच सड़क पर रुक रहे वाहन
Patna: राजधानी पटना में ई-रिक्शा चलाने वालों के लिए एक नई और अजीब मुसीबत खड़ी हो गई है। कुछ शरारती लोग मोबाइल एप का इस्तेमाल करके चलते हुए ई-रिक्शों की बैटरी को दूर बैठे ही लॉक कर रहे हैं। इस वजह से रिक्शे अचानक बीच सफर
Patna: राजधानी पटना में ई-रिक्शा चलाने वालों के लिए एक नई और अजीब मुसीबत खड़ी हो गई है। कुछ शरारती लोग मोबाइल एप का इस्तेमाल करके चलते हुए ई-रिक्शों की बैटरी को दूर बैठे ही लॉक कर रहे हैं। इस वजह से रिक्शे अचानक बीच सफर में बंद हो रहे हैं, जिससे यात्रियों को भारी परेशानी हो रही है और चालकों की कमाई पर बुरा असर पड़ रहा है।
मामला तब सामने आया जब अटल पथ पर स्थित एक बड़े ई-रिक्शा शोरूम में सिर्फ 24 घंटे के भीतर बैटरी लॉक होने की 34 शिकायतें दर्ज हुईं। शोरूम के मैकेनिक विराट ने बताया कि यह पूरा खेल ब्लूटूथ के जरिए खेला जा रहा है। सबसे ज्यादा समस्या JBD और JKBD BMS वाली बैटरियों में देखी जा रही है। एक साथ इतनी सारी शिकायतें आने से सर्विस सेंटर के कर्मचारी भी हैरान हैं।
ई-रिक्शा चालक बिट्टू ने अपना दुख साझा करते हुए बताया कि उनकी बैटरी ठीक होने में करीब छह से सात घंटे लग गए। इस दौरान उन्हें कोई सवारी नहीं मिली और पूरे दिन की कमाई चली गई। बंद रिक्शे को धकेलकर सर्विस सेंटर तक ले जाना भी उनके लिए बड़ी मुसीबत बन गया। चूंकि बैटरी वारंटी में होती है, इसलिए चालक खुद उसमें कोई बदलाव नहीं कर सकते।
NIT Patna के इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग के डॉ. अमितेश कुमार ने बताया कि कमजोर BMS सुरक्षा, डिफॉल्ट पासवर्ड और ब्लूटूथ एक्सेस की वजह से यह समस्या हो रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि आने वाले समय में ऐसी दिक्कतें इलेक्ट्रिक स्कूटर और कारों में भी आ सकती हैं, क्योंकि कई सस्ते इलेक्ट्रिक वाहनों में सुरक्षा मानकों पर ध्यान नहीं दिया जाता है।
तकनीकी जानकारों ने ई-रिक्शा चालकों को सलाह दी है कि वे ‘Pulse’ एप इंस्टॉल करके अपनी बैटरी को खुद कनेक्ट कर लें, ताकि कोई दूसरा व्यक्ति उसे एक्सेस न कर पाए। साथ ही उन्होंने कुछ जरूरी बातें बताई हैं:
- नया इलेक्ट्रिक वाहन खरीदते ही उसका डिफॉल्ट पासवर्ड तुरंत बदलें।
- बिना जरूरत के ब्लूटूथ या वाई-फाई ऑन न रखें।
- केवल अधिकृत एप का ही इस्तेमाल करें।
विशेषज्ञों का मानना है कि ई-रिक्शा कंपनियों को चालकों को उनकी अपनी भाषा में साइबर सुरक्षा और बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम की ट्रेनिंग देनी चाहिए ताकि वे ऐसी डिजिटल शरारतों से बच सकें।