Patna में जमीन-मकान की रजिस्ट्री हुई महंगी, सर्किल रेट दोगुना होने से घर खरीदना होगा मुश्किल

Bihar: पटना और आसपास के इलाकों में अपना घर बनाने का सपना देख रहे लोगों के लिए एक बड़ा झटका आया है। बिहार सरकार ने जमीन की रजिस्ट्री के लिए तय सर्किल रेट में भारी बढ़ोतरी कर दी है, जिससे अब प्रॉपर्टी खरीदना और उसकी रजिस्ट

Bihar: पटना और आसपास के इलाकों में अपना घर बनाने का सपना देख रहे लोगों के लिए एक बड़ा झटका आया है। बिहार सरकार ने जमीन की रजिस्ट्री के लिए तय सर्किल रेट में भारी बढ़ोतरी कर दी है, जिससे अब प्रॉपर्टी खरीदना और उसकी रजिस्ट्री कराना काफी महंगा हो गया है। यह नया नियम गुरुवार, 18 जून 2026 से तुरंत प्रभाव से लागू कर दिया गया है।

सरकार ने शहरी इलाकों में सर्किल रेट को सीधा दोगुना यानी 100% बढ़ा दिया है, जबकि ग्रामीण इलाकों में इसे 60% बढ़ाया गया है। अब से हर साल सर्किल रेट में 5% की अपने आप बढ़ोतरी होगी। इसके अलावा, प्रोहिबिशन, एक्साइज और रजिस्ट्रेशन विभाग अब हर तीन साल में सड़कों, इंडस्ट्रियल जोन और नए इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के आधार पर दरों की समीक्षा करेगा।

रजिस्ट्री की लागत अब इस बात पर निर्भर करेगी कि सर्किल रेट और जमीन की असली कीमत में से कौन सा ज्यादा है, उसी पर स्टाम्प ड्यूटी और फीस लगेगी। आम लोगों के लिए स्टाम्प ड्यूटी की दर में भी 1% की बढ़ोतरी की गई है। हालांकि, महिलाओं के लिए स्टाम्प ड्यूटी में छूट को 0.3% से बढ़ाकर 0.4% कर दिया गया है, जिससे उन्हें कुल 0.5% की राहत मिलेगी।

विवरण शहरी क्षेत्र (Urban) ग्रामीण क्षेत्र (Rural)
सर्किल रेट में बढ़ोतरी 100% (दोगुना) 60%
नियमित मापन शुल्क (प्रति खेसरा) 2,000 रुपये (अधिकतम 8,000) 1,000 रुपये (अधिकतम 4,000)
अर्जेंट मापन शुल्क (प्रति खेसरा) 4,000 रुपये (अधिकतम 16,000) 2,000 रुपये (अधिकतम 8,000)

राजस्व और भूमि सुधार विभाग ने जमीन की मापी (measurement) के शुल्क में भी इजाफा किया है। अधिकारियों का कहना है कि मार्केट रेट और सरकारी रेट के बीच के बड़े अंतर को खत्म करने और काले धन पर लगाम लगाने के लिए यह कदम उठाया गया है। इससे सरकार की सालाना कमाई 7,600 करोड़ रुपये से बढ़कर करीब 16,000 करोड़ रुपये होने का अनुमान है।

दूसरी तरफ, सरकार ने ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप के लिए नई पॉलिसी भी मंजूर की है। इसके तहत शहरी जमीन मालिकों को मार्केट या सर्किल रेट (जो भी ज्यादा हो) का दोगुना मुआवजा मिलेगा, जबकि ग्रामीण जमीन मालिकों को चार गुना मुआवजा और 10% अतिरिक्त इंसेंटिव दिया जाएगा।