Delhi सरकार और कोर्ट के बीच पासपोर्ट पर उलझन, अब MEA ने साफ किया नियम; 1 जुलाई से बढ़ जाएगी फीस

Delhi: पासपोर्ट को लेकर दिल्ली सरकार की सख्ती और अदालतों की अलग-अलग राय के बीच अब विदेश मंत्रालय (MEA) ने बड़ा स्पष्टीकरण दिया है। मंत्रालय ने साफ कर दिया है कि पासपोर्ट सिर्फ एक यात्रा दस्तावेज है और इसे भारतीय नागरिकता

Delhi: पासपोर्ट को लेकर दिल्ली सरकार की सख्ती और अदालतों की अलग-अलग राय के बीच अब विदेश मंत्रालय (MEA) ने बड़ा स्पष्टीकरण दिया है। मंत्रालय ने साफ कर दिया है कि पासपोर्ट सिर्फ एक यात्रा दस्तावेज है और इसे भारतीय नागरिकता का आखिरी सबूत नहीं माना जा सकता। यह जानकारी ‘पासपोर्ट सेवा दिवस’ के मौके पर 24 और 25 जून 2026 को दी गई।

विदेश मंत्रालय ने बताया कि यह कोई नया नियम नहीं है और पिछले 12 सालों से यही व्यवस्था है। पासपोर्ट अधिनियम, 1967 की धारा 20 के तहत कुछ खास हालातों में गैर-नागरिकों को भी पासपोर्ट जारी किया जा सकता है, इसलिए सिर्फ पासपोर्ट होने से कोई व्यक्ति भारतीय नागरिक साबित नहीं होता। हालांकि, 2018 में दिल्ली हाई कोर्ट ने इसे राष्ट्रीयता दर्शाने वाला दस्तावेज माना था, लेकिन कानून में नागरिकता को लेकर कोई सीधा जवाब नहीं मिलता है।

इससे पहले जुलाई 2013 में बॉम्बे हाई कोर्ट ने भी ऐसा ही फैसला सुनाया था कि रद्द किया गया पासपोर्ट नागरिकता का मान्य सबूत नहीं है। कोर्ट ने यह भी कहा था कि 1 जुलाई 1987 के बाद जन्मे लोगों के लिए सिर्फ जन्म प्रमाण पत्र, आधार या पासपोर्ट काफी नहीं होगा, उन्हें यह भी साबित करना होगा कि उनके माता-पिता में से कम से कम एक भारतीय नागरिक था।

इसके साथ ही केंद्र सरकार ने पासपोर्ट बनवाने की फीस में बढ़ोतरी की है, जो 1 जुलाई 2026 से लागू होगी। नए शुल्क की जानकारी नीचे दी गई है:

पासपोर्ट का प्रकार पुरानी फीस नई फीस
36 पेज सामान्य पासपोर्ट ₹1,500 ₹2,500
36 पेज तत्काल पासपोर्ट ₹3,500 ₹5,000

सरकार ने यह भी बताया कि 60 पेज वाले पासपोर्ट और खोए या फटे हुए पासपोर्ट की फीस भी बढ़ा दी गई है। हालांकि, 8 साल तक के बच्चों और 60 साल से ज्यादा उम्र के बुजुर्गों को नए आवेदन पर मिलने वाली 10% की छूट पहले की तरह जारी रहेगी।