पडरौना के कोचिंग सेंटरों में फायर एनओसी का अभाव, लखनऊ हादसे के बाद प्रशासन ने कसी कमर
कुशीनगर/पडरौना: लखनऊ के एक कोचिंग सेंटर में हुए भीषण अग्निकांड के बाद अब पडरौना और पूरे कुशीनगर जिले में हड़कंप मच गया है। 22 जून को हुए इस हादसे में 15 लोगों की जान चली गई थी, जिसके बाद प्रशासन अब उन कोचिंग सेंटरों की ज
कुशीनगर/पडरौना: लखनऊ के एक कोचिंग सेंटर में हुए भीषण अग्निकांड के बाद अब पडरौना और पूरे कुशीनगर जिले में हड़कंप मच गया है। 22 जून को हुए इस हादसे में 15 लोगों की जान चली गई थी, जिसके बाद प्रशासन अब उन कोचिंग सेंटरों की जांच कर रहा है जो बिना फायर एनओसी (अनापत्ति प्रमाण पत्र) के चल रहे हैं। जिले में सुरक्षा मानकों की भारी अनदेखी सामने आई है, जिससे छात्रों की जान को खतरा बना हुआ है।
कुशीनगर जिले की स्थिति काफी चिंताजनक है क्योंकि यहां संचालित लगभग सभी कोचिंग सेंटरों के पास अग्निशमन विभाग की एनओसी नहीं है। जिले में कुल 36 पंजीकृत कोचिंग सेंटर हैं, जिनमें से 25 ने नवीनीकरण कराया है, लेकिन 9 सेंटरों ने यह प्रक्रिया पूरी नहीं की है, जिन्हें नोटिस जारी कर दिए गए हैं। मुख्य अग्निशमन अधिकारी (CFO) सुपात्र शंखधर ने साफ किया है कि जिले के किसी भी कोचिंग सेंटर को अब तक फायर एनओसी जारी नहीं किया गया है। अब प्रशासन अस्पतालों और शैक्षणिक संस्थानों में अभियान चलाकर जांच कर रहा है और बिना एनओसी के किसी भी संस्थान को चलाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
पडरौना के शहरी और कस्बाई इलाकों में कई कोचिंग सेंटर ऐसी संकरी गलियों और बहुमंजिला इमारतों में चल रहे हैं, जहां आग लगने पर बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं है। लखनऊ की घटना के बाद अब कोचिंग संचालक घबराए हुए हैं और अग्निशमन विभाग से संपर्क कर एनओसी लेने की जानकारी जुटा रहे हैं। कुछ सेंटरों ने आनन-फानन में अग्निशामक यंत्र लगाने और इमरजेंसी एग्जिट बनाने का काम शुरू किया है।
उत्तर प्रदेश अग्नि निवारण और अग्नि सुरक्षा अधिनियम, 2005 के तहत कोचिंग सेंटरों, अस्पतालों और मॉल्स के लिए फायर एनओसी लेना अनिवार्य है। नियमों के मुताबिक इमारतों में फायर अलार्म, स्मोक डिटेक्टर और पर्याप्त अग्निशमन उपकरण होने चाहिए। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ हादसे के बाद सख्त निर्देश दिए हैं कि किसी भी बेसमेंट में कोचिंग या व्यावसायिक गतिविधि नहीं होगी। साथ ही उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे कोचिंग सेंटरों का सर्वे करें और जो संस्थान उत्तर प्रदेश कोचिंग विनियमन अधिनियम, 2002 के तहत पंजीकृत नहीं हैं, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करें।
प्रदेश के अन्य शहरों में भी यह अभियान तेज है। प्रयागराज में 93 में से सिर्फ 16 कोचिंग सेंटरों के पास वैध एनओसी मिली। मथुरा में दो दर्जन से ज्यादा कोचिंग और होटल सील किए गए, जबकि नोएडा, गाजियाबाद और वाराणसी में भी सुरक्षा नियमों की अनदेखी करने वाले दर्जनों संस्थानों पर गाज गिरी है। अलीगढ़ में तो एक विशेष केंद्रीय समिति बना दी गई है जो सभी बहुमंजिला इमारतों और स्कूलों का ऑडिट करेगी।