CBSE के On-Screen Marking सिस्टम पर विवाद, NSUI ने Delhi High Court में दाखिल की PIL

Delhi: CBSE द्वारा कक्षा 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं के लिए शुरू किए गए On-Screen Marking (OSM) सिस्टम को लेकर विवाद बढ़ गया है। छात्र संगठन NSUI ने इस डिजिटल मूल्यांकन प्रक्रिया में गड़बड़ियों का आरोप लगाते हुए दिल्ली हाईक

Delhi: CBSE द्वारा कक्षा 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं के लिए शुरू किए गए On-Screen Marking (OSM) सिस्टम को लेकर विवाद बढ़ गया है। छात्र संगठन NSUI ने इस डिजिटल मूल्यांकन प्रक्रिया में गड़बड़ियों का आरोप लगाते हुए दिल्ली हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की है। याचिका में मांग की गई है कि प्रभावित छात्रों के लिए दोबारा वेरिफिकेशन कराया जाए और पूरे मामले की जांच हो।

NSUI ने कोर्ट में क्या शिकायतें की हैं?

NSUI के अध्यक्ष विनोद झाखड़ ने आरोप लगाया है कि OSM सिस्टम में कई तकनीकी खामियां थीं। याचिका के मुताबिक, हजारों छात्रों की स्कैन की हुई उत्तर पुस्तिकाएं धुंधली थीं, कुछ पन्ने गायब थे और कुछ के पेपर गलत अपलोड हुए थे। संगठन का दावा है कि इन वजहों से कई छात्रों के नंबर उम्मीद से बहुत कम आए हैं। साथ ही, उन्होंने बताया कि 1.27 लाख से ज्यादा छात्रों ने अपनी कॉपियों की स्कैन कॉपी मांगी थी, जो सिस्टम की गड़बड़ी को दर्शाता है।

CBSE और शिक्षा मंत्रालय का क्या कहना है?

CBSE ने शुरू में इस सिस्टम को पारदर्शी और सटीक बताया था, लेकिन बाद में बोर्ड ने माना कि सर्विस प्रोवाइडर के पोर्टल में कुछ कमियां थीं। बोर्ड ने कहा कि सुरक्षा को मजबूत करने के लिए IIT और सरकारी एजेंसियों के साइबर एक्सपर्ट्स की मदद ली गई है। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने भी स्वीकार किया कि पहली बार इतने बड़े स्तर पर इस सिस्टम के इस्तेमाल से कुछ विसंगतियां सामने आई हैं और वे छात्रों की जायज शिकायतों को दूर करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

याचिका में किन मुख्य मांगों को रखा गया है?

  • वेरिफिकेशन और री-इवैल्यूएशन पोर्टल को एक महीने के लिए फिर से खोला जाए।
  • जिन छात्रों की स्कैन कॉपी गलत है, उनकी कॉपियों की मैन्युअल चेकिंग और फिजिकल वेरिफिकेशन हो।
  • OSM सिस्टम की गड़बड़ियों की स्वतंत्र जांच कराई जाए।
  • जिन छात्रों के नंबर तकनीकी गलती की वजह से कटे हैं, उन्हें उचित नंबर दिए जाएं।

Frequently Asked Questions (FAQs)

On-Screen Marking (OSM) सिस्टम क्या है?

यह एक डिजिटल मूल्यांकन तरीका है जिसमें उत्तर पुस्तिकाओं को स्कैन करके कंप्यूटर स्क्रीन पर शिक्षकों द्वारा जांचा जाता है। इसमें छात्र की पहचान छिपाने के लिए डिजिटल मास्किंग का उपयोग किया जाता है।

NSUI की PIL पर सुनवाई कब होगी?

NSUI ने 2 जून 2026 को याचिका दायर की थी और उम्मीद है कि दिल्ली हाईकोर्ट में इस मामले की सुनवाई 8 जून 2026 को होगी।