NRI बेच रहे हैं भारत में अपने घर, खरीदारों के पास होंगे ज्यादा विकल्प; मार्केट पर नहीं पड़ेगा बुरा असर
Finance: विदेश में रहने वाले भारतीय (NRI) अब भारत में अपनी रिहायशी प्रॉपर्टीज बेचने की तैयारी कर रहे हैं। एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, इससे बाजार में घरों की संख्या बढ़ेगी जिससे आम खरीदारों को अपनी पसंद का घर चुनने के ज्याद
Finance: विदेश में रहने वाले भारतीय (NRI) अब भारत में अपनी रिहायशी प्रॉपर्टीज बेचने की तैयारी कर रहे हैं। एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, इससे बाजार में घरों की संख्या बढ़ेगी जिससे आम खरीदारों को अपनी पसंद का घर चुनने के ज्यादा मौके मिलेंगे। जानकारों का कहना है कि इससे रियल एस्टेट मार्केट कमजोर नहीं होगा, बल्कि इसमें तरलता बढ़ेगी।
Vancouver स्थित वेल्थ टेक स्टार्टअप Remittor की ‘Annual NRI Wealth Report 2026’ के अनुसार, करीब 46.4% NRI तुरंत अपनी प्रॉपर्टी बेचना चाहते हैं और 26.2% अगले छह महीनों में ऐसा करने की योजना बना रहे हैं। यह ट्रेंड खासकर उन लोगों में दिख रहा है जो अब विदेश में स्थायी रूप से बस चुके हैं। वे अब भारतीय प्रॉपर्टी को भावना के बजाय एक वित्तीय संपत्ति की तरह देख रहे हैं।
बेचने की इस होड़ के पीछे कई कारण हैं, जिनमें विदेशी कर्ज चुकाना, बच्चों की पढ़ाई का खर्च और रिटायरमेंट के लिए बचत करना शामिल है। रिपोर्ट के मुताबिक, बिकने वाली संपत्तियों में 88.8% रिहायशी घर हैं, जिनमें से 63.2% अपार्टमेंट्स हैं। RERA नियमों की वजह से अपार्टमेंट्स के कागजात साफ होते हैं, इसलिए इन्हें बेचना आसान हो गया है।
| राज्य | NRI रिसेल लिस्टिंग का हिस्सा |
|---|---|
| Maharashtra | 26.8% |
| Delhi-NCR | प्रमुख केंद्र |
| अन्य राज्य | Kerala, Gujarat, Karnataka |
CP Kukreja Architects के मैनेजिंग प्रिंसिपल Dikshu C. Kukreja ने बताया कि यह बदलाव निवेशकों द्वारा अपनी संपत्तियों को संतुलित करने का एक तरीका है, न कि भारतीय बाजार पर भरोसे की कमी। वहीं, Trilegal के Himanshu Sinha ने NRI को टैक्स नियमों को ध्यान से समझने की सलाह दी है ताकि TDS की समस्या न हो।
टैक्स नियमों की बात करें तो NRI सेक्शन 395 के तहत फॉर्म 128 भरकर Lower/Nil TDS सर्टिफिकेट के लिए आवेदन कर सकते हैं। साथ ही, सेक्शन 82 के तहत बिक्री से हुए मुनाफे को अगर दो साल के भीतर किसी दूसरी रिहायशी प्रॉपर्टी में लगाया जाता है, तो LTCG टैक्स में छूट मिल सकती है। इसकी अधिकतम सीमा 10 करोड़ रुपये तय की गई है।