Delhi और उत्तर भारत में सोलर बिजली का संकट, कोयला प्लांटों के प्रदूषण से कम हो रही धूप
Delhi: उत्तर भारत के कई राज्यों में सोलर बिजली बनाने में बड़ी दिक्कत आ रही है। कोयले से चलने वाले पावर प्लांटों से निकलने वाला काला धुआं सूरज की रोशनी को रोक रहा है, जिससे सोलर पैनल तक पूरी धूप नहीं पहुंच पा रही है। इस व
Delhi: उत्तर भारत के कई राज्यों में सोलर बिजली बनाने में बड़ी दिक्कत आ रही है। कोयले से चलने वाले पावर प्लांटों से निकलने वाला काला धुआं सूरज की रोशनी को रोक रहा है, जिससे सोलर पैनल तक पूरी धूप नहीं पहुंच पा रही है। इस वजह से दिल्ली और आसपास के इलाकों में सौर ऊर्जा के उत्पादन में भारी गिरावट देखी जा रही है।
ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन के वैज्ञानिकों की एक रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदूषण के कारण उत्तर भारत में करीब 20 फीसदी सौर ऊर्जा का नुकसान हो रहा है। दिल्ली-एनसीआर की बात करें तो यहां करीब 17 फीसदी का नुकसान दर्ज किया गया है। यह स्थिति इसलिए बनी है क्योंकि हवा में मौजूद प्रदूषण सूरज की रोशनी पर एक पर्दे की तरह काम कर रहा है।
IIT दिल्ली के शोधकर्ताओं ने भी इस बात की पुष्टि की है कि वायु प्रदूषण सौर ऊर्जा को बुरी तरह प्रभावित कर रहा है। एक पुराने अध्ययन के अनुसार, 2001 से 2018 के बीच भारत ने प्रदूषण की वजह से अपनी कुल सौर विकिरण क्षमता का 29 फीसदी हिस्सा खो दिया। मई 2026 के एक शोध में यह भी सामने आया कि 2023 में पूरे भारत में सौर ऊर्जा उत्पादन में 9.6 फीसदी की कमी आई, जो दुनिया के औसत 5.8 फीसदी से काफी ज्यादा है।
इस गंभीर समस्या को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 23 फरवरी 2026 को केंद्र सरकार को निर्देश दिया था कि वह दिल्ली-एनसीआर से कोयला आधारित उद्योगों को हटाने के प्रस्ताव पर विचार करे। कोर्ट ने राजधानी के 300 किलोमीटर के दायरे में नए कोयला आधारित थर्मल पावर प्लांट लगाने पर रोक लगाने के सुझाव की जांच करने को भी कहा था।
CREA के विश्लेषण के अनुसार, दिल्ली में पीएम2.5 प्रदूषण का एक बड़ा हिस्सा अमोनियम सल्फेट से बना है। यह तब बनता है जब कोयला प्लांटों से निकलने वाला सल्फर डाइऑक्साइड हवा में मौजूद अमोनिया के साथ मिलता है। वहीं, जुलाई 2025 में पर्यावरण मंत्रालय ने कोयला संयंत्रों के लिए उत्सर्जन नियमों में कुछ ढील दी थी, जिससे कई इकाइयों को प्रदूषण रोकने वाले सिस्टम लगाने से छूट मिल गई थी।