Noida के जेवर एयरपोर्ट से कमर्शियल उड़ानें शुरू, लखनऊ से पहली फ्लाइट ने किया लैंड

UP/Noida: नोएडा के जेवर अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर सोमवार, 15 जून 2026 से कमर्शियल फ्लाइट्स का संचालन शुरू हो गया है। लखनऊ से आई इंडिगो की पहली फ्लाइट ने सुबह एयरपोर्ट के रनवे पर सफल लैंडिंग की, जिसका स्वागत पारंपरिक तरीक

UP/Noida: नोएडा के जेवर अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर सोमवार, 15 जून 2026 से कमर्शियल फ्लाइट्स का संचालन शुरू हो गया है। लखनऊ से आई इंडिगो की पहली फ्लाइट ने सुबह एयरपोर्ट के रनवे पर सफल लैंडिंग की, जिसका स्वागत पारंपरिक तरीके से वाटर कैनन से किया गया। इस ऐतिहासिक मौके पर उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना और कई मंत्री विमान में मौजूद थे।

केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने एयरपोर्ट पर इस परिचालन का उद्घाटन किया और यात्रियों को विशेष टिकट दिए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस सपने को सच किया है, जिससे देश का परिवहन नेटवर्क और मजबूत होगा। इंडिगो के मुख्य रणनीति अधिकारी आलोक सिंह ने इसे पश्चिमी उत्तर प्रदेश और दिल्ली-एनसीआर के यात्रियों के लिए एक बड़ी उपलब्धि बताया।

पहली लैंडिंग के बाद सुबह 8:19 बजे लखनऊ के लिए पहली फ्लाइट रवाना हुई। इस उड़ान में जेवर क्षेत्र के करीब 170-172 किसान शामिल थे, जिनकी जमीन एयरपोर्ट के लिए ली गई थी। ये किसान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलने लखनऊ जा रहे थे। इस यात्रा में जेवर विधायक धीरेंद्र सिंह और YEIDA के अधिकारी भी साथ थे।

सुरक्षा नियमों के चलते एयरपोर्ट के नेतृत्व में बदलाव किया गया और नीतू सामरा को अंतरिम सीईओ नियुक्त किया गया, क्योंकि नियमों के अनुसार सुरक्षा समन्वयक का भारतीय नागरिक होना जरूरी है।

विवरण जानकारी
पहली फ्लाइट (IndiGo) लखनऊ से सुबह 7:58 बजे लैंड हुई
अगली सेवा (Akasa Air) 16 जून से बेंगलुरु और नवी मुंबई के लिए
पहली कार्गो उड़ान 17 जून 2026 को प्रस्थान करेगी
यात्री क्षमता (प्रथम चरण) सालाना 12 मिलियन यात्री
कुल लागत (प्रथम चरण) लगभग 11,582 करोड़ रुपये
विशेषता भारत का पहला नेट-ज़ीरो एमिशन एयरपोर्ट

इंडिगो ने इस एयरपोर्ट से हैदराबाद, जयपुर, चंडीगढ़, अमृतसर और श्रीनगर समेत 16 से ज्यादा घरेलू शहरों के लिए उड़ानें चलाने की योजना बनाई है। जुलाई 2026 तक यहां रोजाना 40 उड़ानों के संचालन की उम्मीद है। यह एयरपोर्ट दिल्ली के IGI एयरपोर्ट पर भीड़ कम करने में मदद करेगा और इसे मल्टी-मॉडल ट्रांसपोर्ट हब के रूप में विकसित किया जा रहा है, जिससे भविष्य में मेट्रो और RRTS की सुविधा भी मिलेगी।