UP: नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर एयरपोर्ट) से यात्रा करने वालों की जेब पर बोझ बढ़ सकता है। उत्तर प्रदेश सरकार ने हवाई ईंधन (ATF) पर टैक्स बहुत कम रखा है, फिर भी यहाँ से फ्लाइट टिकट दिल्ली के IGI एयरपोर्ट के मुकाबले महं
UP: नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर एयरपोर्ट) से यात्रा करने वालों की जेब पर बोझ बढ़ सकता है। उत्तर प्रदेश सरकार ने हवाई ईंधन (ATF) पर टैक्स बहुत कम रखा है, फिर भी यहाँ से फ्लाइट टिकट दिल्ली के IGI एयरपोर्ट के मुकाबले महंगी या उसके बराबर हो सकती हैं। 15 जून 2026 से शुरू होने वाली कमर्शियल उड़ानों के लिए टिकट बुकिंग मई 2026 के आसपास शुरू हुई थी।
नोएडा एयरपोर्ट पर टिकट महंगे होने की क्या वजह है?
विशेषज्ञों और एयरलाइंस के मुताबिक, नोएडा एयरपोर्ट पर लैंडिंग फीस और यूजर चार्ज काफी ज्यादा हैं। घरेलू उड़ानों के लिए बड़े विमानों की लैंडिंग फीस दिल्ली के मुकाबले 119% अधिक है। साथ ही, यात्रियों से लिए जाने वाले यूजर डेवलपमेंट फीस (UDF) की दर दिल्ली एयरपोर्ट से चार गुना ज्यादा प्रस्तावित है। विमानों की पार्किंग फीस भी दिल्ली के मुकाबले लगभग दोगुनी है।
एयरलाइंस और जनप्रतिनिधियों ने क्यों जताई चिंता?
IndiGo ने एयरपोर्ट अथॉरिटी के सामने इस महंगे टैरिफ पर आपत्ति जताई है। कंपनी का कहना है कि एक बड़े विमान की एक राउंड ट्रिप पर दिल्ली के मुकाबले 1.88 लाख रुपये का अतिरिक्त खर्च आएगा। वहीं, जेवर के विधायक धीरेंद्र सिंह ने भी पीएम मोदी और सीएम योगी को पत्र लिखकर इन शुल्कों को कम करने की मांग की है ताकि यात्री इस एयरपोर्ट की तरफ आकर्षित हों।
किराये और संचालन से जुड़ी जरूरी जानकारी
| विवरण |
जानकारी |
| एयरपोर्ट कोड |
DXN |
| कमर्शियल संचालन शुरू |
15 जून, 2026 |
| अंतरराष्ट्रीय उड़ानें |
दिसंबर 2026 के अंत तक |
| बेंगलुरु रूट किराया |
लगभग ₹8,910 (दिल्ली के बराबर) |
| ATF वैट (UP) |
1% (दिल्ली में लगभग 25%) |
Frequently Asked Questions (FAQs)
नोएडा एयरपोर्ट से फ्लाइट्स कब से शुरू होंगी?
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से कमर्शियल उड़ानों का संचालन 15 जून, 2026 से शुरू होने वाला है और अंतरराष्ट्रीय उड़ानें दिसंबर 2026 के अंत तक शुरू होने की उम्मीद है।
टैक्स कम होने के बाद भी किराया महंगा क्यों है?
भले ही UP में ATF पर वैट सिर्फ 1% है, लेकिन लैंडिंग फीस, पार्किंग शुल्क और यूजर डेवलपमेंट फीस (UDF) दिल्ली एयरपोर्ट की तुलना में काफी अधिक हैं, जिससे कुल लागत बढ़ गई है।