Punjab और Haryana: दिल्ली के आसपास के इलाकों में प्रदूषण कम करने के लिए बनाए गए नियमों का पालन न करने पर कई पावर प्लांट पर भारी जुर्माना लगा था। अब National Green Tribunal (NGT) ने चार पावर प्लांट पर लगे इस जुर्माने पर स
Punjab और Haryana: दिल्ली के आसपास के इलाकों में प्रदूषण कम करने के लिए बनाए गए नियमों का पालन न करने पर कई पावर प्लांट पर भारी जुर्माना लगा था। अब National Green Tribunal (NGT) ने चार पावर प्लांट पर लगे इस जुर्माने पर सशर्त रोक लगा दी है। यह फैसला उन प्लांटों के लिए बड़ी राहत है जिन पर फसल अवशेष (Crop Residue) का इस्तेमाल न करने के कारण करोड़ों रुपये का दंड लगाया गया था।
जुर्माना क्यों लगाया गया था और अब क्या हुआ?
CAQM ने दिल्ली के 300 किलोमीटर के दायरे में आने वाले छह कोयला आधारित प्लांटों पर करीब 61 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया था। नियम के मुताबिक, इन प्लांटों को कोयले के साथ कम से कम 5% फसल अवशेष के पेलेट्स या ब्रिकेट्स का इस्तेमाल करना था। साल 2024-25 के लिए यह सीमा 3% रखी गई थी। NGT ने अब Panipat Thermal Power Plant पर लगे 8.97 करोड़ रुपये और Talwandi Sabo Thermal Power Plant पर लगे 33.02 करोड़ रुपये के जुर्माने पर रोक लगा दी है।
राहत मिलने की शर्तें और प्लांटों की दलील
यह रोक पूरी तरह से नहीं है, बल्कि सशर्त है। कंपनियों को जुर्माने की 50% राशि छह हफ्ते के भीतर जमा करनी होगी। पावर प्लांटों की तरफ से दलील दी गई कि बाजार में Torrefied Biomass Pellets की कमी थी, जिसकी बात Central Electricity Authority ने भी मानी है। वहीं CAQM का कहना था कि बायोमास पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध था, लेकिन प्लांटों ने इसका सही इस्तेमाल नहीं किया।
आगे की प्रक्रिया और समय सीमा
Panipat Thermal Power Plant को अपने जवाब और जरूरी विवरण जमा करने के लिए छह हफ्ते का समय दिया गया है। वहीं Talwandi Sabo प्लांट के मामले की अगली सुनवाई 27 जुलाई को होगी। NGT ने साफ किया कि प्रदूषण रोकने वाले नियमों को लागू करना जरूरी है, लेकिन उन्हें लागू करने में आने वाली व्यावहारिक दिक्कतों को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
Frequently Asked Questions (FAQs)
पावर प्लांट पर जुर्माना क्यों लगाया गया था?
पावर प्लांट कोयले के साथ फसल अवशेष (Crop Residue) का निर्धारित प्रतिशत इस्तेमाल नहीं कर रहे थे, जिससे प्रदूषण बढ़ता है।
NGT ने क्या शर्त रखी है?
NGT ने जुर्माने पर रोक लगाने के लिए शर्त रखी है कि कंपनियों को कुल जुर्माने की 50% राशि छह हफ्ते के भीतर जमा करनी होगी।