Delhi: गाजीपुर लैंडफिल को 2027 तक साफ करने के दावे पर NGT ने उठाए सवाल, MCD से मांगा जवाब
Delhi: राजधानी दिल्ली के गाजीपुर इलाके में कचरे का पहाड़ एक बड़ी समस्या बना हुआ है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने एमसीडी (MCD) के उस दावे पर सवाल खड़े किए हैं जिसमें कहा गया था कि दिसंबर 2027 तक इस लैंडफिल को पूरी तरह
Delhi: राजधानी दिल्ली के गाजीपुर इलाके में कचरे का पहाड़ एक बड़ी समस्या बना हुआ है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने एमसीडी (MCD) के उस दावे पर सवाल खड़े किए हैं जिसमें कहा गया था कि दिसंबर 2027 तक इस लैंडफिल को पूरी तरह साफ कर दिया जाएगा। एनजीटी ने पूछा है कि जब हर दिन यहां नया कचरा डाला जा रहा है, तो इसे समय पर साफ करना कैसे संभव होगा।
दरअसल, 6 जुलाई को हुई सुनवाई के दौरान एनजीटी ने पाया कि गाजीपुर लैंडफिल में रोजाना 1,000 से 1,100 मीट्रिक टन बिना ट्रीटमेंट वाला ताजा कचरा पहुंच रहा है। ट्रिब्यूनल ने एमसीडी से इस बात का आधार बताने को कहा है कि वह 2027 तक सफाई का लक्ष्य कैसे पूरा करेगी। इसके साथ ही एनजीटी ने मौजूदा 12 मेगावाट के वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट के इस्तेमाल को लेकर एमसीडी के आंकड़ों में गड़बड़ी की बात भी कही है।
इस मामले में दिल्ली के मेयर प्रवेष वाही ने 8 और 17 जुलाई 2026 को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की। उन्होंने प्रोग्रेस रिपोर्ट पेश करते हुए भरोसा दिलाया कि दिसंबर 2027 तक गाजीपुर लैंडफिल को साफ कर लिया जाएगा। मेयर ने यह भी बताया कि जब से NTPC ने करीब 40 लाख मीट्रिक टन मलबे को हटाना शुरू किया है, तब से काम की रफ्तार बढ़ी है। वहीं, 15 जुलाई को केंद्रीय राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा ने भी साइट का दौरा किया और अधिकारियों को बायोमाइनिंग का काम तेज करने के निर्देश दिए।
कचरे के प्रबंधन के लिए सरकार ने कई कदम उठाए हैं, जिनकी जानकारी नीचे दी गई है:
| योजना/प्रोजेक्ट | विवरण/समय सीमा |
|---|---|
| बायोमाइनिंग क्षमता | 7,000 से बढ़ाकर 12,000 मीट्रिक टन (31 जुलाई 2026 तक) |
| बायोमाइनिंग फेज-2 | सितंबर 2026 तक पूरा होने की उम्मीद |
| नया वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट | 2,000 TPD क्षमता वाला प्लांट, अक्टूबर 2026 तक शुरू होगा |
| बायोगैस फैसिलिटी | 300 TPD क्षमता वाला प्लांट, जिसके बिड 24 जुलाई को खुलने थे |
| ताजा कचरा प्रोसेसिंग | 14 जुलाई को 5,900 मीट्रिक टन रोजाना कचरा प्रोसेस करने का कॉन्ट्रैक्ट दिया गया |
दूसरी तरफ, एनजीटी द्वारा नियुक्त कमिश्नर की 6 जुलाई की रिपोर्ट में कई कमियां सामने आई हैं। रिपोर्ट में बताया गया कि फ्लाई ऐश का निपटान सही से नहीं हो रहा है और लीचेट (कचरे से निकलने वाला गंदा पानी) के मैनेजमेंट में भी गैप है। नियमों के मुताबिक लैंडफिल की ऊंचाई 20 मीटर से ज्यादा नहीं होनी चाहिए, लेकिन गाजीपुर लैंडफिल ने साल 2002 में ही इस सीमा को पार कर लिया था। फिलहाल पूर्वी दिल्ली में रोजाना 2,200 से 2,400 मीट्रिक टन कचरा निकलता है, जिसमें से केवल 1,200 से 1,300 मीट्रिक टन ही प्रोसेस हो पा रहा है।