Delhi और UP में अवैध तरीके से पेड़ काटने वालों पर NGT सख्त, अब चुकाना होगा भारी जुर्माना

Delhi/UP: नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने दिल्ली और उत्तर प्रदेश में अवैध रूप से पेड़ काटने वालों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। ट्रिब्यूनल ने साफ कर दिया है कि पर्यावरण को नुकसान पहुँचाने वालों को अब इसकी भारी कीमत चुकानी

Delhi/UP: नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने दिल्ली और उत्तर प्रदेश में अवैध रूप से पेड़ काटने वालों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। ट्रिब्यूनल ने साफ कर दिया है कि पर्यावरण को नुकसान पहुँचाने वालों को अब इसकी भारी कीमत चुकानी होगी। दिल्ली के यमुना विहार और छतरपुर के साथ-साथ यूपी के फिरोजाबाद में भी पेड़ों की कटाई को लेकर बड़ी कार्रवाई के आदेश दिए गए हैं।

दिल्ली के यमुना विहार इलाके में अवैध कटाई को लेकर NGT ने बड़ा आदेश दिया है। ट्रिब्यूनल ने डिप्टी कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट (सेंट्रल) को निर्देश दिया है कि यहाँ जितने भी पेड़ अवैध तरीके से काटे गए हैं, उनके बदले इस मानसून सीजन में कम से कम 10 पौधे लगाए जाएं। इन पौधों को लगाने और अगले पांच साल तक उनकी देखभाल करने का पूरा खर्च उसी व्यक्ति या संस्था को उठाना होगा जिसने पेड़ काटे थे। इस मामले में भजनपुरा पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज की गई थी और कड़कड़डूमा कोर्ट में चार्जशीट भी दाखिल हो चुकी है।

वहीं छतरपुर की अंबेडकर कॉलोनी में भी वन भूमि पर 23 पेड़ अवैध रूप से काटे गए थे। एक जॉइंट कमेटी की रिपोर्ट में सामने आया कि खसरा नंबर 100, 101, 102, 103 और 105 में बिना अनुमति के 28 पेड़ काटे गए। NGT ने दिल्ली सरकार से छह हफ्ते के भीतर इस मामले की स्टेटस रिपोर्ट मांगी है। सरकार ने भरोसा दिलाया है कि वन भूमि पर कब्जा करने और पेड़ काटने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है। इस मामले की अगली सुनवाई 29 सितंबर को होगी।

उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले में भी NGT ने सख्ती दिखाई है। यहाँ शिकोहाबाद इलाके में, जो कि ताज ट्रैपेज़ियम ज़ोन (TTZ) के अंतर्गत आता है, पेड़ों की अवैध कटाई और छंटाई की शिकायत मिली थी। जांच में पाया गया कि निजी जमीन पर एक नीम का पेड़ काटा गया और आम व जामुन के पांच पेड़ों की टहनियां बिना अनुमति के हटाई गईं। जस्टिस अरुण कुमार त्यागी और ए सेंथिल वेल की बेंच ने फिरोजाबाद वन विभाग को उत्तर प्रदेश संरक्षण वृक्ष अधिनियम, 1976 के तहत दोषियों पर कानूनी कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।

इन सभी मामलों की निगरानी NGT के चेयरपर्सन जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव और एक्सपर्ट मेंबर ए सेंथिल वेल कर रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि पर्यावरण नियमों का उल्लंघन करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा और कानून के मुताबिक सख्त कदम उठाए जाएंगे।