Delhi: दिल्ली-एनसीआर में नीट (NEET) एडमिशन के नाम पर चल रहे एक बड़े फर्जीवाड़े को पुलिस ने पकड़ा है। इस ऑपरेशन में पुलिस ने 18 छात्रों को बचाया है और गिरोह के चार सदस्यों को गिरफ्तार किया है, जिनमें एक डॉक्टर भी शामिल है
Delhi: दिल्ली-एनसीआर में नीट (NEET) एडमिशन के नाम पर चल रहे एक बड़े फर्जीवाड़े को पुलिस ने पकड़ा है। इस ऑपरेशन में पुलिस ने 18 छात्रों को बचाया है और गिरोह के चार सदस्यों को गिरफ्तार किया है, जिनमें एक डॉक्टर भी शामिल है। यह गैंग नीट उम्मीदवारों और उनके परिवारों को 20 से 30 लाख रुपये लेकर एमबीबीएस (MBBS) सीट दिलाने का झूठा वादा करता था।
इस स्कैम में कौन-कौन शामिल था और क्या था उनका रोल?
दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच ने इस रैकेट के चार मुख्य लोगों को पकड़ा है। संतोष कुमार जैसवाल (50), जो बिहार का रहने वाला है और पैथोलॉजी लैब चलाता था, इस पूरे फर्जीवाड़े का मास्टरमाइंड था। डॉ. अखलाक आलम (25), जिसने किर्गिस्तान से एमबीबीएस किया है, उसने पुराने पेपरों से 149 पन्नों का एक फर्जी दस्तावेज तैयार किया ताकि छात्रों को लगे कि उनके पास असली सवाल हैं। संत प्रताप सिंह (59) छात्रों के रहने के लिए होटल और फ्लैट का इंतजाम करता था, जबकि सूरत का विनोद भाई भीखा भाई पटेल नए छात्रों को फंसाकर इस जाल में लाता था।
छात्रों को कैसे फंसाया गया और क्या-क्या जब्त हुआ?
यह गिरोह छात्रों को दिल्ली-एनसीआर और गाजियाबाद के अलग-अलग होटलों और फ्लैटों में रखकर उन्हें यकीन दिलाता था कि उन्हें परीक्षा के लीक सवाल मिलेंगे। आरोपियों ने उम्मीदवारों से 20-30 लाख रुपये के अलावा उनकी 10वीं और 12वीं की असली मार्कशीट और गारंटी के तौर पर साइन किए हुए खाली चेक भी ले रखे थे। पुलिस ने छापेमारी के दौरान वह 149 पन्नों का फर्जी दस्तावेज और तीन खाली चेक बरामद किए हैं।
पुलिस की कार्रवाई और अभिभावकों के लिए चेतावनी
यह पूरी कार्रवाई सूरत पुलिस से मिली जानकारी के बाद 2 मई 2026 को शुरू की गई थी। डीसीपी (क्राइम) संजीव कुमार यादव ने बताया कि यह गैंग व्यवस्थित तरीके से परिवारों को धोखा दे रहा था। पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता की धाराओं के तहत धोखाधड़ी और साजिश का केस दर्ज किया है। पुलिस ने सभी छात्रों और अभिभावकों को सलाह दी है कि वे ऐसे किसी भी फर्जी एडमिशन रैकेट के झांसे में न आएं और सतर्क रहें।
Frequently Asked Questions (FAQs)
नीट स्कैम के आरोपी छात्रों से कितने पैसे वसूल रहे थे?
यह गिरोह हर उम्मीदवार से एमबीबीएस सीट दिलाने के नाम पर 20 से 30 लाख रुपये की मांग कर रहा था और गारंटी के तौर पर खाली चेक और ओरिजिनल सर्टिफिकेट भी ले रहा था।
इस मामले में कितने लोग गिरफ्तार हुए हैं और वे कहां से हैं?
पुलिस ने कुल 4 लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें बिहार का संतोष कुमार, किर्गिस्तान से पढ़ा डॉक्टर अखलाक, प्रॉपर्टी डीलर संत प्रताप सिंह और सूरत का विनोद भाई पटेल शामिल हैं।