NCR में पुराने ट्रक और बसें बदलना होगा आसान, सरकार ने PARIVARTAN स्कीम के नियम किए मंजूर, मिलेंगी भारी छूट
NCR: दिल्ली-एनसीआर के प्रदूषण को कम करने के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय (MoHUA) ने PARIVARTAN स्कीम की गाइडलाइन्स को मंजूरी दे दी है। इस योजना का मकसद पुराने और ज्यादा प्रदूष
NCR: दिल्ली-एनसीआर के प्रदूषण को कम करने के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय (MoHUA) ने PARIVARTAN स्कीम की गाइडलाइन्स को मंजूरी दे दी है। इस योजना का मकसद पुराने और ज्यादा प्रदूषण फैलाने वाले ट्रकों और बसों को हटाकर उनकी जगह BS-VI या इलेक्ट्रिक गाड़ियां लाना है।
केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने इन नियमों को मंजूरी दी है, जिससे अब यह स्कीम जमीन पर लागू होने के लिए तैयार है। यह योजना मुख्य रूप से दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के उन इलाकों में काम करेगी जो नेशनल कैपिटल रीजन (NCR) के अंदर आते हैं। सरकार का लक्ष्य है कि पुराने वाहनों को हटाकर हवा की क्वालिटी (AQI) में सुधार किया जाए।
इस स्कीम के लिए कुल 9,585 करोड़ रुपये का बजट तय किया गया है। इसमें केंद्र सरकार 5,041 करोड़ रुपये देगी और राज्यों से करीब 1,601 करोड़ रुपये टैक्स छूट के रूप में मिलने की उम्मीद है। इस योजना के तहत वाहन मालिकों को कई तरह के फायदे मिलेंगे:
| फायदे का प्रकार | विवरण |
|---|---|
| टैक्स में छूट | नए वाहनों पर 100% और पुराने वाहनों पर 10 साल तक 50% तक की छूट |
| रजिस्ट्रेशन फीस | राज्य सरकारों द्वारा रजिस्ट्रेशन फीस माफ की जाएगी |
| लोन पर ब्याज | केंद्र सरकार की तरफ से 5 साल के लिए 5% ब्याज में राहत |
| गाड़ियों पर डिस्काउंट | नई गाड़ियों की एक्स-शोरूम कीमत पर कम से कम 8% की छूट |
| ईंधन सहायता | डीजल और CNG गाड़ियों के लिए 5 साल तक 4,800 रुपये महीने का वाउचर |
| अन्य लाभ | इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए एकमुश्त वित्तीय मदद और CoD ट्रेडिंग की सुविधा |
नियमों के मुताबिक, BS-III या उससे पुराने वाहनों को रजिस्टर्ड स्क्रैपिंग सेंटर में कबाड़ करना जरूरी होगा। वहीं BS-IV गाड़ियों को या तो स्क्रैप किया जा सकता है या फिर NCR से बाहर किसी गैर-NCAP शहर में बेचा जा सकता है। इसके बाद मालिक को NCR में ही BS-VI या इलेक्ट्रिक गाड़ी खरीदनी होगी। दिल्ली के लिए खास नियम हैं कि यहां हल्के मालवाहक वाहन सिर्फ इलेक्ट्रिक होने चाहिए और बसें या तो BS-VI CNG हों या इलेक्ट्रिक।
इस पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए एक डिजिटल प्लेटफॉर्म बनाया जाएगा। टाटा मोटर्स, अशोक लेलैंड और महिंद्रा जैसे बड़े वाहन निर्माता कंपनियां भी इस स्कीम से जुड़ी हैं। हालांकि, सरकारी गाड़ियों को इस योजना से बाहर रखा गया है।