Delhi में NCPEDP लाएगा खास पॉलिसी पेपर, दिव्यांगों के लिए आसान होगी Assistive Technology की पहुंच

Delhi: दिव्यांग लोगों की जिंदगी आसान बनाने के लिए National Centre for Promotion of Employment for Disabled People (NCPEDP) एक बड़ा कदम उठाने जा रहा है। Mphasis के सहयोग से संस्था एक खास पॉलिसी पेपर पेश करेगी, जिसका नाम &

Delhi: दिव्यांग लोगों की जिंदगी आसान बनाने के लिए National Centre for Promotion of Employment for Disabled People (NCPEDP) एक बड़ा कदम उठाने जा रहा है। Mphasis के सहयोग से संस्था एक खास पॉलिसी पेपर पेश करेगी, जिसका नाम ‘Assistive Technology in India’ होगा। इसका मकसद दिव्यांग लोगों को तकनीक के जरिए ज्यादा आत्मनिर्भर बनाना और उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत करना है।

यह पॉलिसी पेपर 24 जून 2026 को लॉन्च किया जाएगा। दुनिया भर में करोड़ों लोगों को चश्मे, सुनने की मशीन, व्हीलचेयर और अन्य सहायक उपकरणों की जरूरत होती है, लेकिन गरीब और मध्यम आय वाले देशों में 10 प्रतिशत से भी कम लोगों तक ये चीजें पहुंच पाती हैं। भारत में भी यह स्थिति गंभीर है। आंकड़ों के मुताबिक, भारत में करीब 2.68 करोड़ दिव्यांग लोग हैं, जिनमें से ग्रामीण इलाकों के 70 प्रतिशत लोगों के पास इन जरूरी सेवाओं की कमी है।

NCPEDP के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर Arman Ali ने कहा कि सहायक तकनीक को सिर्फ मदद या खैरात के तौर पर नहीं, बल्कि एक जरूरी सामाजिक और आर्थिक ढांचे के रूप में देखा जाना चाहिए। यह पेपर सरकार को एक ऐसा रोडमैप देगा जिससे दिव्यांगों, बुजुर्गों और शारीरिक अक्षमता वाले लोगों के लिए तकनीक को सस्ता और सुलभ बनाया जा सके। इससे उनकी शिक्षा, नौकरी और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच बेहतर होगी।

इस पहल के साथ ही NCPEDP और Mphasis ने ‘AT Hub’ भी शुरू किया है। इस हब के जरिए उन स्टार्टअप्स को मदद दी जा रही है जो दिव्यांगों के लिए नए और सस्ते उपकरण बना रहे हैं। साल 2026 के सीड ग्रांट प्रोग्राम के तहत शुरुआती दौर के स्टार्टअप्स को 5 लाख रुपये तक की आर्थिक मदद दी जाएगी, ताकि वे ऐसे समाधान निकाल सकें जिससे दिव्यांग लोग बिना किसी सहारे के अपना काम कर सकें।

भारत में Rights of Persons with Disabilities Act 2016 के तहत 18 साल तक के दिव्यांग छात्रों को मुफ्त सहायक उपकरण देने का प्रावधान है। सरकार का ‘सुगम्य भारत अभियान’ भी इसी दिशा में काम कर रहा है, लेकिन इस नए पॉलिसी पेपर से उम्मीद है कि अब व्यक्तिगत जरूरतों के हिसाब से बेहतर और आधुनिक तकनीक उपलब्ध हो पाएगी।