Odisha: नयगरह जिले की मशहूर मिठाई Chhenapoda को Geographical Indication (GI) टैग दिलाने की कोशिशें जारी हैं। पुरी सांसद Dr. Sambit Patra ने इसके लिए केंद्र सरकार को पत्र लिखा था ताकि स्थानीय कारीगरों और मिठाई बनाने वालों
Odisha: नयगरह जिले की मशहूर मिठाई Chhenapoda को Geographical Indication (GI) टैग दिलाने की कोशिशें जारी हैं। पुरी सांसद Dr. Sambit Patra ने इसके लिए केंद्र सरकार को पत्र लिखा था ताकि स्थानीय कारीगरों और मिठाई बनाने वालों को आर्थिक फायदा मिल सके। हालांकि, आवेदन जमा होने के बाद भी अब तक यह टैग नहीं मिल पाया है, जिससे स्थानीय लोगों में नाराजगी है।
Chhenapoda को GI टैग मिलने में देरी क्यों हो रही है?
नयगरह के Chhenapoda के लिए GI टैग की आधिकारिक अर्जी 30 मार्च 2023 को ORMAS द्वारा चेन्नई स्थित GI रजिस्ट्री ऑफिस में दाखिल की गई थी। 12 मार्च 2025 को राज्य के MSME मंत्री गोकुलानंद मल्लिक ने विधानसभा में बताया कि यह आवेदन अभी प्री-एग्जामिनेशन स्टेज पर है। वहीं, कुछ लोगों का कहना है कि दस्तावेजों में मिठाई के असली बनाने वालों और सही जगह (दस्पल्ला) की जानकारी कम होने की वजह से देरी हो रही है।
GI टैग के लिए अब तक क्या-क्या कदम उठाए गए?
- 2019: रसगुल्ला को GI टैग मिलने के बाद छेनापोड़ा और अरिसा पीठा के लिए चर्चा शुरू हुई।
- 2020: सांसद Dr. Sambit Patra ने वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल को पत्र लिखकर प्रक्रिया तेज करने की मांग की।
- 2023: ‘कृष्णा छेनापोड़ा प्रोड्यूसर ग्रुप’ की तरफ से औपचारिक आवेदन फाइल किया गया।
- 2026: ‘वर्ल्ड छेनापोड़ा डे’ के मौके पर नयगरह विकास मंच ने फिर से टैग की मांग उठाई।
मिठाई के असली खोजकर्ता को लेकर क्या है विवाद?
छेनापोड़ा को लेकर स्थानीय स्तर पर इस बात की बहस जारी है कि इसे असल में किसने बनाया था। कुछ लोग इसका श्रेय बिद्याधर साहू को देते हैं, तो कुछ उनके बेटे सुदर्शन साहू को। राज्य सरकार ने 2022 से हर साल 11 अप्रैल को ‘छेनापोड़ा दिवस’ मनाना शुरू किया है, जो सुदर्शन साहू की जयंती से जुड़ा है। नयगरह कलेक्टर ने भरोसा दिया है कि टैग दिलाने की प्रक्रिया जल्द ही फिर से शुरू होगी।