Maharashtra: नवी मुंबई नगर निगम (NMMC) पिछले दस सालों से शहर को हरा-भरा बनाने के लिए कई पेड़ लगाने के प्रोजेक्ट चला रहा है। लेकिन एक RTI से पता चला है कि निगम के पास इस बात का कोई पुख्ता डेटा नहीं है कि लगाए गए पेड़ों मे
Maharashtra: नवी मुंबई नगर निगम (NMMC) पिछले दस सालों से शहर को हरा-भरा बनाने के लिए कई पेड़ लगाने के प्रोजेक्ट चला रहा है। लेकिन एक RTI से पता चला है कि निगम के पास इस बात का कोई पुख्ता डेटा नहीं है कि लगाए गए पेड़ों में से कितने वास्तव में जीवित बचे। प्रशासन ने पैसा तो खर्च किया, लेकिन पेड़ों के बचने की दर (Survival Rate) का कोई हिसाब नहीं रखा।
RTI में क्या सामने आया और क्या है विवाद
NatConnect Foundation ने RTI के जरिए जानकारी मांगी थी, जिसके जवाब में NMMC ने 43 पन्नों के दस्तावेज दिए। इन कागजों में वर्क ऑर्डर, मंजूरी और खर्च का ब्योरा तो था, लेकिन यह नहीं बताया गया कि कितने फलदार या स्थानीय पेड़ जीवित रहे। NatConnect Foundation के डायरेक्टर B N Kumar ने इसे टालमटोल वाला जवाब बताया है। उन्होंने कहा कि वार्ड के हिसाब से कोई हिसाब-किताब या ऑडिट नहीं किया गया है।
पेड़ों की देखभाल और बजट पर सवाल
विशेषज्ञों का कहना है कि शहर की कठिन परिस्थितियों में पौधों को बचाने के लिए लंबे समय तक देखभाल की जरूरत होती है। लेकिन NMMC के प्रोजेक्ट्स में अक्सर सिर्फ एक साल के रखरखाव का नियम होता है, जो काफी नहीं है। वहीं, 31 मार्च 2026 को पेश किए गए बजट में भी पर्यावरण के लिए बहुत कम जोर दिया गया है, जिससे पर्यावरण प्रेमी नाराज हैं।
निगम का पक्ष और अन्य दावे
दूसरी तरफ, NMMC ने एक ट्री सेंसस (पेड़ गणना) की रिपोर्ट जारी की थी, जिसमें दावा किया गया कि पिछले आठ सालों में पेड़ों की संख्या 78% बढ़ी है और शहर में कुल 15,28,779 पेड़ हैं। हालांकि, यह डेटा उन खास प्रोजेक्ट्स के सर्वाइवल रेट के सवाल का जवाब नहीं देता। इसके अलावा, कमिश्नर Kailas Shinde ने बताया कि Palm Beach Road अंडरपास के डिजाइन को बदलने के लिए IIT-Bombay से सलाह ली गई है ताकि ज्यादा से ज्यादा पेड़ों को बचाया जा सके।
Frequently Asked Questions (FAQs)
NMMC के पेड़ लगाने के प्रोजेक्ट्स में मुख्य समस्या क्या है?
मुख्य समस्या यह है कि निगम ने पेड़ लगाने पर पैसा तो खर्च किया, लेकिन इस बात का कोई consolidated डेटा नहीं रखा कि लगाए गए पेड़ों में से कितने जीवित बचे।
पर्यावरण विशेषज्ञों ने रखरखाव के नियम पर क्या कहा है?
विशेषज्ञों के अनुसार, शहरी इलाकों में पौधों को बचाने के लिए एक साल का रखरखाव काफी नहीं है, उन्हें कई सालों तक लगातार देखभाल की जरूरत होती है।