Maharashtra: नवी मुंबई के खारघर इलाके में उत्सव चौक के पास बन रहा एक पब्लिक टॉयलेट प्रशासन की लापरवाही की भेंट चढ़ गया। Cidco ने इस निर्माणाधीन टॉयलेट को पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया है, जिसे बनाने में करीब 2.3 करोड़ रुपये
Maharashtra: नवी मुंबई के खारघर इलाके में उत्सव चौक के पास बन रहा एक पब्लिक टॉयलेट प्रशासन की लापरवाही की भेंट चढ़ गया। Cidco ने इस निर्माणाधीन टॉयलेट को पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया है, जिसे बनाने में करीब 2.3 करोड़ रुपये की लागत आंकी गई थी। इस कार्रवाई के बाद इलाके में राजनीतिक माहौल गरमा गया है और सरकारी पैसे की बर्बादी पर सवाल उठ रहे हैं।
Cidco ने टॉयलेट क्यों ढहाया?
Cidco ने बताया कि यह निर्माण जमीन पर अतिक्रमण करके किया गया था। खारघर में किसी भी निर्माण के लिए Cidco से NOC (अनापत्ति प्रमाण पत्र) लेना जरूरी होता है, लेकिन Panvel City Municipal Corporation (PCMC) ने बिना अनुमति के काम शुरू कर दिया था। Cidco ने MRTP एक्ट और कोर्ट के निर्देशों का पालन करते हुए इस अवैध ढांचे को हटा दिया है।
पैसे की बर्बादी और राजनीतिक विवाद
इस घटना के बाद शिव सेना (UBT) और अन्य स्थानीय नेताओं ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि बिना जमीन की जांच किए करोड़ों रुपये खर्च करना जनता के पैसे की बर्बादी है। हालांकि, PCMC प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि ठेकेदार Ashoka Developers को अभी तक कोई भुगतान नहीं किया गया है, क्योंकि अनुमति मिलने से पहले ही काम शुरू हो गया था।
अधिकारियों और मेयर का क्या कहना है?
पनवेल के मेयर नितिन पाटिल ने माना कि बिना अनुमति काम शुरू करना गलत था, लेकिन उन्होंने कहा कि PCMC ने Cidco से अनुमति के लिए पत्राचार किया था। वहीं Cidco के अधिकारियों ने साफ किया है कि वे सार्वजनिक जमीन को बचाने और नियोजित विकास के लिए किसी भी तरह के अवैध निर्माण के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रखेंगे।
Frequently Asked Questions (FAQs)
टॉयलेट बनाने में कितना खर्च हुआ और क्या ठेकेदार को पैसे मिले?
टॉयलेट की अनुमानित लागत 2.3 करोड़ रुपये थी, लेकिन PCMC प्रशासन के अनुसार ठेकेदार Ashoka Developers को अब तक कोई भुगतान नहीं किया गया है।
Cidco ने किस आधार पर यह कार्रवाई की?
Cidco ने इसे जमीन पर अतिक्रमण और बिना NOC के किया गया अवैध निर्माण माना, जिसे MRTP एक्ट के तहत ढहाया गया।