Maharashtra: नासिक के TCS ऑफिस में चल रहे विवाद पर Association for Protection of Civil Rights (APCR) ने अपनी रिपोर्ट जारी की है। मुंबई प्रेस क्लब में पेश की गई इस रिपोर्ट में कहा गया है कि ऑफिस के अंदर किसी भी तरह के संग
Maharashtra: नासिक के TCS ऑफिस में चल रहे विवाद पर Association for Protection of Civil Rights (APCR) ने अपनी रिपोर्ट जारी की है। मुंबई प्रेस क्लब में पेश की गई इस रिपोर्ट में कहा गया है कि ऑफिस के अंदर किसी भी तरह के संगठित धार्मिक धर्मांतरण या ‘लव जिहाद’ के सबूत नहीं मिले हैं। यह मामला मार्च 2026 से चर्चा में है जिसमें कुछ कर्मचारियों ने गंभीर आरोप लगाए थे।
APCR की रिपोर्ट में क्या बातें सामने आईं?
APCR की पांच सदस्यों वाली टीम ने 4 अप्रैल 2026 को नासिक का दौरा किया था। रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ शिकायतों में धार्मिक टिप्पणी की बात तो कही गई है, लेकिन किसी व्यवस्थित तरीके से धर्म बदलने की कोशिश का कोई ठोस सबूत नहीं मिला। संस्था के नेशनल सेक्रेटरी नदीम खान ने कहा कि किसी को जबरन व्रत रखने या धार्मिक रीति-रिवाजों के लिए मजबूर करने की बात जांच में सही नहीं पाई गई।
TCS और पुलिस की अब तक की क्या कार्रवाई रही?
TCS ने इस मामले में अपनी जीरो टॉलरेंस पॉलिसी दोहराई है और आरोपी कर्मचारियों को सस्पेंड कर दिया है। कंपनी के CEO के. कृतिवासन ने बताया कि आधिकारिक सिस्टम के जरिए ऐसी कोई शिकायत नहीं मिली थी, जबकि टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने आंतरिक जांच के आदेश दिए थे। पुलिस की कार्रवाई का विवरण नीचे दी गई टेबल में है:
| विवरण |
जानकारी |
| कुल FIR |
9 (26 मार्च से 3 अप्रैल के बीच) |
| गिरफ्तार लोग |
7 कर्मचारी (6 पुरुष, 2 महिला) |
| जांच एजेंसी |
नासिक पुलिस SIT, ATS, NIA और IB |
| मुख्य आरोपी |
दानिश शेख, तौसिफ अत्तार, निदा खान समेत अन्य |
आगे की मांग और विवाद क्या है?
APCR और PUCL जैसे नागरिक समाज समूहों ने स्थानीय पुलिस की जांच पर भरोसा नहीं जताया है। उन्होंने मांग की है कि इस पूरे मामले की जांच एक रिटायर्ड जज की देखरेख में होनी चाहिए। साथ ही, उन्होंने शिकायतकर्ताओं और आरोपियों दोनों का नार्को टेस्ट कराने की मांग की है ताकि सच सामने आ सके। एक्टिविस्ट निरंजन तकले ने बताया कि निदा खान को पहले HR मैनेजर बताया गया था, लेकिन कंपनी ने साफ किया कि वह सिर्फ एक टेलीकॉलर थीं और उनके पास ऐसी कोई पावर नहीं थी।