Delhi और UP: राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम (NCRTC) ने दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ कॉरिडोर पर चल रही नमो भारत ट्रेन के लिए एक नई योजना बनाई है। अब सराय काले खां से मेरठ तक के 21 स्टेशनों के नाम बदले जा सकते हैं। NCRTC न
Delhi और UP: राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम (NCRTC) ने दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ कॉरिडोर पर चल रही नमो भारत ट्रेन के लिए एक नई योजना बनाई है। अब सराय काले खां से मेरठ तक के 21 स्टेशनों के नाम बदले जा सकते हैं। NCRTC ने कंपनियों को इन स्टेशनों पर विज्ञापन और ब्रांडिंग के लिए आमंत्रित किया है ताकि गैर-किराया राजस्व (non-fare revenue) बढ़ाया जा सके।
स्टेशनों के नाम कैसे बदलेंगे और ब्रांडिंग कहाँ होगी?
इस योजना के तहत चुनी गई कंपनियां स्टेशन के असली नाम के आगे या पीछे अपना ब्रांड नाम जोड़ सकेंगी। ब्रांडिंग केवल नाम तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि स्टेशन के अंदरूनी हिस्सों, कॉन्कोर्स एरिया, प्लेटफॉर्म, एंट्री-एग्जिट गेट और बाहर लगे खंभों पर भी कंपनियों के लोगो दिखेंगे। इतना ही नहीं, ट्रेन के अंदर होने वाली अनाउंसमेंट में भी को-ब्रांडेड स्टेशन का नाम बोला जाएगा। कंपनियों को स्टेशन मैप पर जगह और ग्राहकों से जुड़ने के लिए कियोस्क लगाने की सुविधा भी मिलेगी।
कितने समय के लिए होगा यह कॉन्ट्रैक्ट और कौन से स्टेशन शामिल हैं?
निविदा के मुताबिक, इस लाइसेंस की शुरुआती अवधि 10 साल की होगी, जिसे बाद में आपसी सहमति से 5 साल और बढ़ाया जा सकता है। NCRTC का मानना है कि ये स्टेशन घनी आबादी, बाजारों और कॉलेजों के पास हैं, जिससे कंपनियों को अच्छा प्रचार मिलेगा।
| प्रमुख स्टेशन |
क्षेत्र/लोकेशन |
| सराय काले खां, न्यू अशोक नगर, आनंद विहार |
Delhi |
| साहिबाबाद, गाजियाबाद, दुहाई, मुरादनगर |
Ghaziabad |
| मोदी नगर साउथ, मोदी नगर नॉर्थ |
Modinagar |
| मेरठ साउथ, परतापुर, रिठानी, शताब्दी नगर, ब्रह्मपुरी, मेरठ सेंट्रल, भैसाली, बेगमपुल, एमईएस कॉलोनी, डौरली, मेरठ नॉर्थ, मोदीपुरम |
Meerut |
नमो भारत सेवा 21 अक्टूबर 2023 से शुरू हुई थी और अब तक 3 करोड़ से ज्यादा लोग इसकी यात्रा कर चुके हैं। यह मॉडल दिल्ली मेट्रो की तर्ज पर तैयार किया गया है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
नमो भारत के स्टेशनों के नाम क्यों बदले जा रहे हैं?
NCRTC कंपनियों को ब्रांडिंग और विज्ञापन के अधिकार बेचकर गैर-किराया राजस्व (non-fare revenue) कमाना चाहता है, जिससे कॉरिडोर के संचालन में मदद मिले।
क्या यात्रियों को स्टेशन पहचानने में दिक्कत होगी?
नहीं, क्योंकि कंपनियां स्टेशन के वास्तविक नाम के साथ अपना ब्रांड नाम जोड़ेंगी, जिससे पुराना नाम भी बना रहेगा और नया ब्रांड भी जुड़ेगा।