Maharashtra: नागपुर के काटोल तहसील के राउलगांव में SBL Energy Limited फैक्ट्री में हुए भीषण धमाके ने पूरे इलाके को हिला दिया था। इस हादसे में 26 मजदूरों की जान चली गई और 16 लोग घायल हुए। अब इस मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट
Maharashtra: नागपुर के काटोल तहसील के राउलगांव में SBL Energy Limited फैक्ट्री में हुए भीषण धमाके ने पूरे इलाके को हिला दिया था। इस हादसे में 26 मजदूरों की जान चली गई और 16 लोग घायल हुए। अब इस मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए कंपनी के 6 सीनियर अधिकारियों की अंतरिम जमानत याचिका खारिज कर दी है।
कोर्ट ने जमानत देने से क्यों किया इनकार?
बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर बेंच ने जस्टिस एम.एम. नेरलीकर के नेतृत्व में सुनवाई की। कोर्ट ने कहा कि इतने सारे लोगों की मौत वाला मामला गंभीर है और इसे हल्के में नहीं लिया जा सकता। कोर्ट ने फैक्ट्री मैनेजमेंट की तरफ से ‘घोर लापरवाही’ की बात कही। जिन अधिकारियों की जमानत खारिज हुई है, उनमें कंपनी के डायरेक्टर रवि कामरा, राकेश तिवारी, वाइस प्रेसिडेंट चंद्रशेखर राजवाड़, सीनियर जनरल मैनेजर संदीप सोलंकी, जनरल मैनेजर प्रदीप शर्मा और सुपरवाइजर विलास मालवे शामिल हैं। हालांकि, कोर्ट ने पंकज पांडे और नीलकमल डोंगरे समेत 5 अन्य आरोपियों को अंतरिम जमानत दे दी है।
फैक्ट्री में क्या-क्या कमियां थीं?
जांच में सामने आया है कि यह हादसा सरकारी नियमों की कमी से नहीं, बल्कि फैक्ट्री के अंदर सुरक्षा इंतजामों में बड़ी चूक की वजह से हुआ। जून 2024 में हुए एक निरीक्षण में ही कई खामियां पकड़ी गई थीं, लेकिन उन्हें ठीक नहीं किया गया। मुख्य कमियां नीचे दी गई तालिका में हैं:
| सुरक्षा में चूक |
विवरण |
| ट्रेनिंग की कमी |
एक भी मजदूर को खतरनाक काम की ट्रेनिंग नहीं दी गई थी |
| अधिकारियों की कमी |
सेफ्टी और वेलफेयर ऑफिसर की नियुक्ति नहीं की गई थी |
| उपकरणों की कमी |
फ्लेमप्रूफ CCTV और पाइपलाइनों पर प्रोटेक्टिव गार्ड नहीं थे |
| मेडिकल सुविधा |
फैक्ट्री में मेडिकल ऑफिसर और सुसज्जित एम्बुलेंस नहीं थी |
| ऑडिट की कमी |
इंटरनल सेफ्टी ऑडिट और इमरजेंसी इंतजाम नहीं थे |
| स्टॉक मैनेजमेंट |
विस्फोटक नियमों के तहत गोला-बारूद का स्टॉक समय पर क्लियर नहीं किया गया |
अब आगे क्या होगा?
इस मामले में अब तक 32 लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता के तहत केस दर्ज किया गया है, जिसमें गैर-इरादतन हत्या और खतरनाक सामग्री की लापरवाही से हैंडलिंग के आरोप हैं। कंपनी का मालिक आलोक चौधरी फिलहाल फरार है और पुलिस उसकी तलाश कर रही है। महाराष्ट्र के मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने भी इस मामले में लापरवाही की बात कही है और PESO, DISH और लेबर कमिश्नरेट की जवाबदेही तय करने की मांग की है।