Bihar: मुंगेर जिले के स्वास्थ्य विभाग ने दवाओं की उपलब्धता के मामले में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। जिला लगातार तीसरी बार पूरे राज्य में पहले नंबर पर रहा है। यहाँ के स्वास्थ्य केंद्रों पर 92 प्रतिशत जरूरी दवाएं उपलब्ध प
Bihar: मुंगेर जिले के स्वास्थ्य विभाग ने दवाओं की उपलब्धता के मामले में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। जिला लगातार तीसरी बार पूरे राज्य में पहले नंबर पर रहा है। यहाँ के स्वास्थ्य केंद्रों पर 92 प्रतिशत जरूरी दवाएं उपलब्ध पाई गईं, जिससे मरीजों को अब बाहर से दवा खरीदने की जरूरत कम पड़ेगी।
दवाओं की उपलब्धता और रैंकिंग कैसे तय हुई?
राज्य स्तर से अब हर हफ्ते जिले के स्वास्थ्य केंद्रों पर दवाओं की समीक्षा की जा रही है। जिला स्तर पर भी सिविल सर्जन डॉ. राजू और जिला कार्यक्रम प्रबंधक (DPM) मो फैजान आलम अशरफी की देखरेख में हर हफ्ते प्रखंड के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारियों के साथ मीटिंग होती है। अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि दवाओं की उपलब्धता निर्धारित मानक के हिसाब से बनी रहे ताकि आम जनता को परेशानी न हो।
अस्पतालों की स्थिति और हालिया चुनौतियां
उपलब्धता में नंबर वन होने के बावजूद कुछ समस्याएं भी सामने आई हैं। 10 मई 2026 को सदर अस्पताल की ओपीडी में दवाओं की लिस्ट अपडेट न होने से मरीजों में भ्रम फैला, जिस पर सिविल सर्जन ने स्पष्टीकरण मांगा है। साथ ही, मुंगेर के सदर अस्पताल और तारापुर व हवेली खड़गपुर के अनुमंडल अस्पतालों का नवीनीकरण पिछले एक साल से लंबित है। जमालपुर के हालिमपुर गौरीपुर स्वास्थ्य केंद्र में एक्सपायर्ड दवाएं बांटने का मामला भी सामने आया था, जिसकी जांच टीम गठित की गई है।
क्षेत्रीय समीक्षा में क्या रहा नतीजा?
क्षेत्रीय उप निदेशक डॉ. राजेश कुमार की अध्यक्षता में हुई बैठक में मुंगेर के मातृ स्वास्थ्य (ANC पंजीकरण) की रफ्तार धीमी पाई गई। हालांकि, इसी बैठक में शेखपुरा और बेगूसराय जिलों में दवाओं की कमी देखी गई, जिसके बाद वहां के अस्पतालों को शत-प्रतिशत दवाएं सुनिश्चित करने का आदेश दिया गया था।
Frequently Asked Questions (FAQs)
मुंगेर स्वास्थ्य विभाग को यह उपलब्धि क्यों मिली?
मुंगेर जिले के स्वास्थ्य केंद्रों पर 92 प्रतिशत निर्धारित दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की गई, जिसके कारण यह जिला लगातार तीसरी बार राज्य में पहले स्थान पर रहा।
दवाओं की निगरानी के लिए अब क्या नया सिस्टम है?
पहले दवाओं की समीक्षा हर महीने होती थी, लेकिन अब राज्य और जिला स्तर दोनों जगह हर हफ्ते समीक्षा की जा रही है ताकि दवाओं की कमी न हो।