Mumbai की महिला की टैक्स जंग में जीत, पति ने प्रॉपर्टी के लिए भेजे थे 80 लाख रुपये, ITAT ने दिया बड़ा फैसला
Finance: मुंबई की एक महिला को इनकम टैक्स विभाग के एक बड़े विवाद से राहत मिली है। इनकम टैक्स अपीलेट ट्रिब्यूनल (ITAT) ने महिला के पक्ष में फैसला सुनाया है, जिसे विभाग ने 80 लाख रुपये की ‘अस्पष्ट निवेश’ (unexpl
Finance: मुंबई की एक महिला को इनकम टैक्स विभाग के एक बड़े विवाद से राहत मिली है। इनकम टैक्स अपीलेट ट्रिब्यूनल (ITAT) ने महिला के पक्ष में फैसला सुनाया है, जिसे विभाग ने 80 लाख रुपये की ‘अस्पष्ट निवेश’ (unexplained investment) मानकर टैक्स लगाने की कोशिश की थी। यह मामला पति द्वारा प्रॉपर्टी के लिए भेजे गए पैसों से जुड़ा था।
पूरा मामला असेसमेंट ईयर 2016-17 का है। मुंबई की रहने वाली सनोबर अजज अहमद सौदागर के पति दुबई में काम करते थे। उन्होंने अपनी पत्नी की ओर से प्रॉपर्टी बेचने वाले व्यक्ति को सीधे 80 लाख रुपये का भुगतान किया था। यह पैसा अधिकृत माध्यमों (authorized channels) से भेजा गया था, लेकिन इनकम टैक्स विभाग ने इसे सेक्शन 69 के तहत बिना हिसाब वाला निवेश मान लिया था।
ITAT की मुंबई बेंच ने 11 जून 2026 को इस मामले में फैसला सुनाया। ट्रिब्यूनल ने कहा कि सिर्फ एक पुराने रेमिटेंस डॉक्यूमेंट के न होने से किसी निवेश को ‘अस्पष्ट’ नहीं माना जा सकता, खासकर तब जब मामला करीब 10 साल पुराना हो और बाकी सभी सबूत सही हों। कोर्ट ने पाया कि टैक्स विभाग ने पति की पहचान, उनकी कमाई की क्षमता और प्रॉपर्टी विक्रेता के खाते में पैसे पहुंचने की बात पर कोई सवाल नहीं उठाया था।
महिला ने अपनी बात साबित करने के लिए ये दस्तावेज पेश किए थे:
- रजिस्टर्ड सेल डीड (Sale Deed)
- पति द्वारा किया गया गिफ्ट डीड (Gift Deed)
- भुगतान की पुष्टि करने वाला पति का हलफनामा (Affidavit)
- पति और विक्रेता दोनों के बैंक स्टेटमेंट
इस फैसले पर विशेषज्ञों ने भी अपनी राय दी है। चार्टर्ड अकाउंटेंट सुरेश सुराना ने बताया कि यह फैसला साफ करता है कि सिर्फ शक के आधार पर सेक्शन 69 के तहत टैक्स नहीं जोड़ा जा सकता, अगर टैक्सपेयर ने मजबूत सबूत दिए हों। वहीं CA दिनेश के जैन ने कहा कि 10 साल पुराने हर एक कागज की उम्मीद करना व्यावहारिक नहीं है। यह फैसला NRI और विदेश से भारत पैसा भेजने वाले लोगों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है।