Mumbai में गहराया जल संकट, झीलों का स्तर 10% से नीचे गिरा; पानी के टैंकरों के दाम बढ़े
Maharashtra: मुंबई में पानी की भारी किल्लत हो गई है। शहर को पानी देने वाली सात झीलों में पानी का स्तर गिरकर अब केवल 9.67% रह गया है। मानसून की देरी की वजह से हालात खराब हुए हैं और अब लोगों को पानी के टैंकरों के लिए ज्याद
Maharashtra: मुंबई में पानी की भारी किल्लत हो गई है। शहर को पानी देने वाली सात झीलों में पानी का स्तर गिरकर अब केवल 9.67% रह गया है। मानसून की देरी की वजह से हालात खराब हुए हैं और अब लोगों को पानी के टैंकरों के लिए ज्यादा पैसे चुकाने पड़ रहे हैं। जानकारों का मानना है कि शहर के पास अब सिर्फ 40 दिनों का पीने का पानी बचा है।
पानी की कमी को देखते हुए Brihanmumbai Municipal Corporation (BMC) ने कड़े कदम उठाए हैं। पूरे शहर में 10% पानी की कटौती पहले ही लागू की जा चुकी है। अब 17 जून से इंडस्ट्रियल यूनिट्स, कमर्शियल ऑफिस और स्पोर्ट्स क्लबों के लिए पानी की सप्लाई में 20% की कटौती कर दी गई है। साथ ही, सभी कंस्ट्रक्शन साइट्स का पानी का कनेक्शन काट दिया गया है और नए कनेक्शन भी नहीं दिए जाएंगे। शहर के स्विमिंग पूल में भी पानी की सप्लाई बंद कर दी गई है।
BMC ने रेलवे, नेवी और पोर्ट जैसे बड़े संस्थानों को निर्देश दिया है कि वे अपने काम के लिए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के ट्रीटेड पानी का इस्तेमाल करें। प्रशासन ने साफ चेतावनी दी है कि अगर कोई भी नगर निगम के पीने के पानी को बर्बाद करेगा, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
इस संकट का सीधा असर आम जनता की जेब पर पड़ा है। Mumbai Water Tankers Association (MWTA) के मुताबिक, पानी की मांग बढ़ने से टैंकरों के दाम बढ़ गए हैं। पिछले एक हफ्ते में रेट्स 200 से 500 रुपये तक बढ़ चुके हैं।
| पानी का प्रकार | पुराना रेट (प्रति 10,000 लीटर) | नया रेट (प्रति 10,000 लीटर) |
|---|---|---|
| गैर-पीने योग्य (Non-potable) | 1,500 – 1,800 रुपये | 1,800 – 2,000 रुपये |
| पीने योग्य (Potable) | 2,300 – 3,300 रुपये | 2,500 – 3,500 रुपये |
कुछ इलाकों में लोग BMC के पीने योग्य पानी के टैंकर के लिए 4,500 रुपये तक दे रहे हैं। वहीं, Thane Municipal Corporation (TMC) ने भी रखरखाव के काम के लिए ठाणे के कुछ हिस्सों में 18 जून दोपहर से 24 घंटे के लिए पानी की सप्लाई बंद करने का ऐलान किया है। IMD के अनुसार, El Niño की स्थिति की वजह से मानसून में देरी हुई है, जिससे झीलों के जलग्रहण क्षेत्रों में बारिश नहीं हुई है।