Mumbai में VVIP रेलवे टिकट घोटाला उजागर, ‘राज भवन’ का नाम ‘लोक भवन’ होने से पकड़ा गया जालसाज

Maharashtra: मुंबई के घाटकोपर का एक कपड़ा व्यापारी पिछले दो साल से रेलवे अधिकारियों को चकमा देकर VVIP कोटा टिकटों का फर्जीवाड़ा कर रहा था। यह पूरा खेल तब खुला जब गृह मंत्रालय के एक आदेश के बाद ‘राज भवन’ का ना

Maharashtra: मुंबई के घाटकोपर का एक कपड़ा व्यापारी पिछले दो साल से रेलवे अधिकारियों को चकमा देकर VVIP कोटा टिकटों का फर्जीवाड़ा कर रहा था। यह पूरा खेल तब खुला जब गृह मंत्रालय के एक आदेश के बाद ‘राज भवन’ का नाम बदलकर ‘लोक भवन’ कर दिया गया, लेकिन जालसाज अभी भी पुराने लेटरहेड का इस्तेमाल कर रहा था।

यह घोटाला कोविड-19 महामारी के दौरान शुरू हुआ था। मुख्य आरोपी अमरीश ठक्कर का कपड़ों का कारोबार था, जो महामारी की वजह से ठप हो गया था। इसके बाद उसने फर्जी सिफारिशी पत्र बनाकर VVIP और इमरजेंसी कोटा (EQ) के तहत कंफर्म टिकट दिलाने का रैकेट शुरू किया। वह राज्यपाल कार्यालय के अधिकारियों के फर्जी हस्ताक्षर और स्टैम्प का इस्तेमाल करता था।

फरवरी 2026 में सेंट्रल रेलवे के अधिकारियों को LTT-राजगीर एक्सप्रेस और छपरा एक्सप्रेस के लिए आए दो आरक्षण अनुरोध संदिग्ध लगे। जब इन पत्रों को सत्यापन के लिए ‘लोक भवन’ भेजा गया, तो वहां के अधिकारियों ने पाया कि ये पत्र राज्यपाल कार्यालय द्वारा जारी नहीं किए गए थे। जांच में पता चला कि पत्रों पर अभी भी पुराना नाम ‘राज भवन’ लिखा था, जबकि जनवरी 2026 में ही इसका नाम बदलकर ‘लोक भवन’ हो चुका था।

मुख्य विवरण जानकारी
मुख्य आरोपी अमरीश ठक्कर (घाटकोपर, मुंबई)
गिरफ्तार लोग कुल 5 व्यक्ति (अमरीश ठक्कर और 4 अन्य ब्रोकर)
पकड़े जाने का कारण राज भवन का नाम बदलकर लोक भवन होना
फर्जीवाड़ा तरीका VVIP/इमरजेंसी कोटा के लिए फर्जी लेटरहेड का उपयोग
पुलिस स्टेशन मालाबार हिल पुलिस (मुंबई)
शिकायतकर्ता विशाल सुधीर शिंदे (लोक भवन अधिकारी)

राज्यपाल के ADC ने दस्तावेजों की जांच की और पुष्टि की कि लेटरहेड, हस्ताक्षर और स्टैम्प पूरी तरह फर्जी थे। इसके बाद लोक भवन के अधिकारी विशाल सुधीर शिंदे ने मालाबार हिल पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 29-30 जुलाई 2026 के बीच अमरीश ठक्कर और उसके साथी शत्रुंजय राजकुमार यादव उर्फ ​​अनूप समेत पांच लोगों को गिरफ्तार कर लिया।