Maharashtra: मुंबई के वर्सोवा बीच पर 12 अप्रैल को करीब 300 लोग पर्यावरण को बचाने के लिए इकट्ठा हुए। ‘Green Mumbai Sunday’ नाम के इस शांतिपूर्ण प्रदर्शन में लोगों ने मैंग्रोव और शहर के हरे-भरे इलाकों को बचाने
Maharashtra: मुंबई के वर्सोवा बीच पर 12 अप्रैल को करीब 300 लोग पर्यावरण को बचाने के लिए इकट्ठा हुए। ‘Green Mumbai Sunday’ नाम के इस शांतिपूर्ण प्रदर्शन में लोगों ने मैंग्रोव और शहर के हरे-भरे इलाकों को बचाने की मांग की। इस कार्यक्रम का आयोजन ‘Save Mumbai Mangroves’ ग्रुप ने किया था, जिसमें ‘Save Aarey’ और ‘Save SGNP’ जैसे अभियानों से जुड़े लोग भी शामिल हुए।
विरोध प्रदर्शन क्यों हो रहा है और क्या हैं मुख्य मांगें?
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि विकास के नाम पर पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुँचाया जा सकता। लोगों का आरोप है कि तटीय और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के फैसले लेते समय स्थानीय लोगों से सलाह नहीं ली गई। रैली में शामिल लोगों ने नारेबाजी की और सरकार से टिकाऊ विकास (sustainable development) को प्राथमिकता देने की मांग की।
Versova-Bhayandar Coastal Road का क्या मामला है?
दिसंबर 2025 में बॉम्बे हाई कोर्ट ने वर्सोवा-भायंदर कोस्टल रोड प्रोजेक्ट को मंजूरी दे दी थी। इस प्रोजेक्ट की वजह से करीब 45,000 मैंग्रोव पेड़ों के कटने का खतरा है। एक्टिविस्ट अब इस मामले में नए कानूनी आधार तैयार कर रहे हैं क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने अभी तक इसमें हस्तक्षेप नहीं किया है।
स्थानीय समुदाय और प्रशासन का क्या कहना है?
- कोली समुदाय: मोहित नाम के एक स्थानीय मछुआरे ने बताया कि मैंग्रोव उनके लिए एक खजाने की तरह हैं, जिनका इस्तेमाल दवाइयों के लिए भी होता है।
- राजनीतिक रुख: मार्च 2026 में शिवसेना (UBT) विधायक आदित्य ठाकरे ने एक्टिविस्ट से मुलाकात की और कोस्टल रोड नॉर्थ प्रोजेक्ट में मैंग्रोव कटाई के नियमों के उल्लंघन का मुद्दा विधानसभा में उठाने का वादा किया।
- BMC पर आरोप: एक्टिविस्ट्स का दावा है कि BMC ने बिना स्टेज II फॉरेस्ट क्लियरेंस लिए ही सतह के मैंग्रोव काटना शुरू कर दिया है।