Maharashtra: मुंबई यूनिवर्सिटी के उन छात्रों के सामने अब एक बड़ा फैसला है जो National Education Policy (NEP) 2020 के तहत पढ़ाई कर रहे हैं। यह पहला बैच है जिसे यह तय करना है कि वे 3 साल बाद अपनी ग्रेजुएशन पूरी कर लें या फ
Maharashtra: मुंबई यूनिवर्सिटी के उन छात्रों के सामने अब एक बड़ा फैसला है जो National Education Policy (NEP) 2020 के तहत पढ़ाई कर रहे हैं। यह पहला बैच है जिसे यह तय करना है कि वे 3 साल बाद अपनी ग्रेजुएशन पूरी कर लें या फिर चौथे साल की पढ़ाई करके Honours डिग्री लें। छात्रों के बीच इस बात को लेकर काफी असमंजस है कि चौथे साल की पढ़ाई से उन्हें नौकरी मिलने में कितनी मदद मिलेगी।
3 साल और 4 साल की डिग्री में क्या है अंतर?
NEP 2020 के नियमों के मुताबिक छात्रों के पास पढ़ाई छोड़ने और दोबारा जुड़ने के कई विकल्प हैं। अगर कोई छात्र 3 साल बाद कोर्स छोड़ता है तो उसे एक साधारण Bachelor’s degree मिलेगी। वहीं जो छात्र चौथे साल की पढ़ाई पूरी करेंगे, उन्हें Honours या Research के साथ Honours की डिग्री दी जाएगी। इसके लिए मुंबई यूनिवर्सिटी ने कुछ शर्तें भी रखी हैं, जैसे Research ट्रैक के लिए न्यूनतम 7.5 CGPA होना जरूरी है।
इंजीनियरिंग छात्रों और अन्य विकल्पों के लिए क्या नियम हैं?
मुंबई यूनिवर्सिटी ने इंजीनियरिंग के छात्रों के लिए खास फैसला लिया है। जो छात्र 3 साल बाद कोर्स छोड़ेंगे, उन्हें BSc (Tech Engineering) की डिग्री दी जाएगी ताकि उन्हें ड्रॉपआउट न माना जाए। यूनिवर्सिटी एक ऐसे प्रस्ताव पर भी विचार कर रही है जिससे 4 साल पूरे करने वाले छात्रों को दो डिग्री मिल सकें।
- 1 साल बाद: UG सर्टिफिकेट
- 2 साल बाद: UG डिप्लोमा
- 3 साल बाद: Bachelor’s डिग्री
- 4 साल बाद: Honours या Honours with Research डिग्री
छात्रों और कॉलेज प्रिंसिपल्स की क्या चिंताएं हैं?
कॉलेजों के प्रिंसिपल्स ने ‘ड्यूल डिग्री’ के विचार को थोड़ा असामान्य बताया है और इस पर और स्पष्टता मांगी है। वहीं छात्रों का कहना है कि उन्हें यह समझ नहीं आ रहा कि 4 साल की डिग्री का मार्केट में क्या फायदा होगा या फिर सीधे मास्टर डिग्री करना ज्यादा बेहतर रहेगा। इसी वजह से कई कॉलेजों में केवल 15 से 25 प्रतिशत छात्र ही चौथे साल के लिए आगे बढ़ने का मन बना रहे हैं।