Mumbai में पेड़ गिरने से मौतों का सिलसिला बढ़ा, सड़कों के कंक्रीटीकरण पर उठे सवाल

Maharashtra/Mumbai: मुंबई में मानसून के दौरान पेड़ गिरने की घटनाओं ने लोगों की जान लेना शुरू कर दिया है। पिछले एक हफ्ते में तीन लोगों की मौत हो गई, जिनमें एक 11 साल का बच्चा और एक 18 साल का युवक शामिल है। चौंकाने वाली बा

Maharashtra/Mumbai: मुंबई में मानसून के दौरान पेड़ गिरने की घटनाओं ने लोगों की जान लेना शुरू कर दिया है। पिछले एक हफ्ते में तीन लोगों की मौत हो गई, जिनमें एक 11 साल का बच्चा और एक 18 साल का युवक शामिल है। चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से दो हादसे उन सड़कों पर हुए जिन्हें हाल ही में कंक्रीट से पक्का किया गया था।

BMC के आंकड़ों के मुताबिक, पेड़ गिरने की घटनाओं में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। साल 2023 में 687, 2024 में 653 और 2025 में यह संख्या बढ़कर 855 तक पहुंच गई। 2020 से 2022 के बीच सिर्फ 4 मौतें हुई थीं, लेकिन 2023 से जुलाई 2026 के बीच अब तक कम से कम 11 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। कुर्ला में 63 साल के यूनुस कुंडवाला और चेंबूर में स्कूल वैन पर पेड़ गिरने से विहान श्रीवास्तव की मौत ने प्रशासन की पोल खोल दी है।

पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि सड़कों को कंक्रीट से ढंकने की वजह से पेड़ों की जड़ों को हवा और पानी नहीं मिल पा रहा है, जिससे वे कमजोर होकर गिर रहे हैं। अरबोरिस्ट वैभव राजे ने बताया कि कंक्रीटीकरण से जड़ें सड़ने लगती हैं और पेड़ अस्थिर हो जाते हैं। चेंबूर हादसे के बाद BMC ने गार्डन विभाग के जगदीश भोइर और रोड विभाग के अरुण मुंडे को लापरवाही के आरोप में सस्पेंड कर दिया है। गार्डन विभाग ने पहले ही रोड विभाग को चेतावनी दी थी कि कंक्रीटीकरण से पेड़ को नुकसान हो रहा है, लेकिन इसे नजरअंदाज किया गया।

इस गंभीर स्थिति को देखते हुए म्युनिसिपल कमिश्नर अश्विनी भिडे ने 3 जुलाई 2026 को एक सर्कुलर जारी किया। अब शहर भर में पेड़ों का ऑडिट होगा और जड़ों के पास से कंक्रीट हटाया जाएगा। नए नियमों के मुताबिक, पेड़ के तने के चारों ओर कम से कम 1 मीटर की जगह खाली रखनी होगी और वहां केवल काली मिट्टी भरी जाएगी। इंजीनियरों को आदेश दिया गया है कि वे सात दिनों के भीतर मौजूदा सड़कों का निरीक्षण करें और जड़ों के पास जमा कंक्रीट को हटाकर मिट्टी का बेसिन बनाएं।

दूसरी तरफ, बॉम्बे हाई कोर्ट भी इस मामले में सख्त है। कोर्ट ने BMC को मार्च 2025 की एक सर्वे रिपोर्ट पर विचार करने को कहा है, जिसमें दावा किया गया है कि मुंबई के करीब 80 प्रतिशत पेड़ों के चारों ओर अभी भी कंक्रीट है। वकील हितेंद्र गांधी ने भी BMC को लीगल नोटिस भेजकर पूरे शहर में डी-कंक्रीटीकरण की मांग की है।