Mumbai में 11 दिनों में गिरे 1,856 पेड़, 3 की मौत; BMC के पास नहीं है पेड़ों की सेहत जांचने की मशीन
Maharashtra: मुंबई में मानसून की बारिश के दौरान पेड़ों के गिरने से भारी तबाही हुई है। पिछले 11 दिनों में शहर में कुल 1,856 पेड़ गिरे, जिसमें 3 लोगों की जान चली गई और 12 से ज्यादा लोग घायल हुए। सबसे दुखद मामला चेंबूर का र
Maharashtra: मुंबई में मानसून की बारिश के दौरान पेड़ों के गिरने से भारी तबाही हुई है। पिछले 11 दिनों में शहर में कुल 1,856 पेड़ गिरे, जिसमें 3 लोगों की जान चली गई और 12 से ज्यादा लोग घायल हुए। सबसे दुखद मामला चेंबूर का रहा जहां एक स्कूल बस पर पीपल का पेड़ गिरने से 11 साल के छात्र की मौत हो गई।
शहर के सबसे अमीर निकाय BMC के पास पेड़ों की हालत जांचने के लिए Resistograph जैसी मशीन नहीं है। रिकॉर्ड बताते हैं कि शहर का ट्री सेंसस (पेड़ों की गिनती) 10 साल पुराना हो चुका है। आखिरी बार पूरा सर्वे 2011 में हुआ था। हालांकि अप्रैल 2026 से नया सर्वे शुरू करने की बात कही गई है, जिसे पूरा होने में करीब डेढ़ साल लगेंगे।
म्युनिसिपल कमिश्नर अश्विनी भिड़े ने इन हादसों की वजह तेज हवाओं को बताया है। उन्होंने कहा कि हवा की रफ्तार सामान्य से तीन गुना ज्यादा थी। इसके साथ ही IIT बॉम्बे और मुंबई यूनिवर्सिटी के एक्सपर्ट्स अब इस बात की स्टडी करेंगे कि तेजी से बढ़ते शहरीकरण के बीच पेड़ों को कैसे बचाया जाए।
जांच में यह बात सामने आई है कि 2023 में शुरू हुए सड़क कंक्रीटीकरण प्रोजेक्ट के दौरान रोड विभाग ने ट्री अथॉरिटी से सलाह नहीं ली थी। अक्टूबर 2023 से मार्च 2026 के बीच पेड़ों की जड़ों को नुकसान पहुंचाने के लिए 400 से ज्यादा नोटिस जारी किए गए। चेंबूर हादसे की शुरुआती जांच में पता चला कि सड़क निर्माण के दौरान खुदाई से जड़ों को नुकसान पहुंचा, जिससे पेड़ अंदर से खोखला हो गया और गिर गया।
हादसों के बाद BMC ने अब कड़े कदम उठाए हैं। कमिश्नर ने आदेश दिया है कि जहां भी पेड़ों के तनों के चारों ओर कंक्रीट जमा है, उसे तुरंत हटाया जाए। साथ ही एक आंतरिक कमेटी ने सिफारिश की है कि इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के दौरान पेड़ों की जड़ों को नुकसान पहुंचाने वाले ठेकेदारों और अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए। मेयर ऋतु तावड़े ने एक मृतक के परिवार को 5 लाख रुपये की सहायता राशि देने और पूरे शहर का ट्री ऑडिट कराने का निर्देश दिया है। भविष्य में पेड़ों की निगरानी के लिए ‘वृक्ष मित्र’ प्रोग्राम शुरू करने की योजना भी है।